केंद्र सरकार ने बुधवार को यूरोपीय संघ से सेब आयात में वृद्धि की आशंकाओं को कम करने की कोशिश की। एक दिन पहले मंगलवार को भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की घोषणा की गई थी। सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ से केवल 50,000 टन सेब ही आएंगे। इन पर 20 फीसदी शुल्क लगेगा और इनका न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) 80 रुपये प्रति किलोग्राम होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह है कि यूरोपीय संघ से आने वाले सेबों पर 96 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम प्रभावी मूल्य लगेगा, जिससे घरेलू मूल्य स्थिरता बनी रहेगी और किसानों की आय सुरक्षित रहेगी।
यह मात्रा अगले 10 वर्षों में बढ़कर सालाना 1,00,000 टन हो जाएगी। भारत में वर्तमान में सेब के आयात पर करीब 50 फीसदी शुल्क लगता है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 2024 में भारत ने करीब 5,00,000 टन सेब का आयात किया था।
इसमें से करीब 26 फीसदी यानी 1,33,447 टन ईरान से आता है जबकि 23 फीसदी यानी करीब 1,16,680 टन तुर्किए से और 42,716 टन यानी 8.2 फीसदी अफगानिस्तान से आता है। यूरोपीय संघ का योगदान करीब 56,717 टन यानी 11.3 फीसदी है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब इस कोटे पर शुल्क कम लगेगा। भारत में वर्तमान में आयातित सेबों पर 50 फीसदी शुल्क लगता है।
मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के तहत यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड से सस्ते सेबों की बाढ़ की संभावना के खिलाफ कुछ दिन पहले देश के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों में से एक हिमाचल प्रदेश में हजारों सेब उत्पादकों ने राज्य विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया था।