भारत ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मंगलवार को अपने व्यापार समझौते को अंतिम रूप देते हुए यह अधिकार सुरक्षित रखा है कि वह आठ पारंपरिक और मौजूदा यूरोपीय वाहन कंपनियों के लिए वाहन टैरिफ कोटा को सीमित कर सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दूसरे देशों की चारपहिया वाहन कंपनियां इस नियम का फायदा उठाकर भारत में सस्ती गाड़ियों का अंबार न लगाएं यानी भारत यह चाहता है कि इस करार का फायदा सिर्फ यूरोपीय कंपनियों को मिले।
एक सरकारी अधिकारी ने बुधवार को कहा, ‘हमने यूरोपीय संघ के गैर-पारंपरिक वाहन निर्माताओं को इन लाभों से वंचित करने का अधिकार रखा है।’ वाणिज्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत, वाहन क्षेत्र को चरणबद्ध तरीके से और सावधानी पूर्वक खोलने की योजना बना रहा है जिसका मकसद इस क्षेत्र का विकास करना है और यह कोटा प्रणाली के अनुसार काम करेगी।
वाहन क्षेत्र बेहद संवेदनशील है इसलिए बदलावों को ध्यानपूर्वक और नियंत्रित तरीके से लागू किया जाएगा ताकि कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। 10 साल की अवधि में हर साल पेट्रोल/डीजल इंजन वाली कुल 1.6 लाख कारों और 90,000 इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को लाने की छूट दी गई है। समझौते के पहले वर्ष में, पेट्रोल/डीजल कारों पर लगाए जाने वाले मौजूदा 110 फीसदी के आयात शुल्क को घटाकर व्यापार समझौते के लागू होने पर 30 से 35 फीसदी कर दिया जाएगा और अगले पांच वर्षों में इसे 10 फीसदी तक लाया जाएगा।
अहम बात यह है कि 15,000 यूरो से कम कीमत वाली गाड़ियों पर कोई आयात शुल्क कटौती नहीं होगी। इसका अर्थ यह है कि भारतीय ग्राहकों के लिए कर के बाद यह लगभग 25 से 26 लाख रुपये होगा। सरकार का कहना है कि भारत में लगभग 90 फीसदी गाड़ियों का बाजार लगभग 15 लाख रुपये तक का ही है।
यूरोपीय संघ का जोर ज्यादातर महंगी गाड़ियों पर रहता है क्योंकि वे 15,000 से 20,000 यूरो से कम कीमत वाली गाड़ियां नहीं बनाते। दूसरी तरफ, भारत छोटी और सस्ती गाड़ियां बनाता है। इसी वजह से सरकार ने इस क्षेत्र का बचाव करने का फैसला किया है।
एक अधिकारी ने बताया, ‘सोच-समझकर दी गई पेशकश से यूरोपीय आपूर्तिकर्ताओं को भारतीय बाजार में अपने मॉडल लॉन्च करने और फिर भारत में ज्यादा गाड़ियां बनाने की गुंजाइश देगा।’ उन्होंने आगे कहा कि टैरिफ कोटा ज्यादातर बड़ी इंजन क्षमता वाली गाड़ियों और ज्यादा कीमत वाली ईवी पर है जबकि कम और मध्यम कीमत वाली ईवी को सुरक्षित रखा गया है।
यूरोप के ईवी के लिए बाजार तुरंत नहीं खुलेगा, क्योंकि भारत इस उभरते उद्योग को बचाना चाहता है। ईवी के लिए कोटा पांच साल बाद शुरू होगा, जिससे स्थानीय वाहन निर्माताओं को अपना दायरा बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। बदले में, यूरोपीय संघ को दिए गए प्रत्येक कार कोटे के बदले भारत को अपने निर्यात के लिए 2.5 गुना अधिक पहुंच मिलेगी।