भारतीय बाजार में आने वालो दिनों में बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, लेम्बॉर्गिनी, पोर्श और ऑडी जैसी प्रीमियम लग्जरी यूरोपीय कारें सस्ती हो सकती हैं। दरअसल, भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मंगलवार को हुए व्यापार समझौता (FTA) में कोटा-आधारित रियायतें देने फैसले के बाद कीमतों में कमी आने की उम्मीद है। यह समझौता साल 2027 से लागू हो सकता है।
भारत-ईयू द्विपक्षीय व्यापार समझौते में जहां EU भारतीय ऑटोमोबाइल्स पर शुल्क को अलग-अलग चरणों में समाप्त करेगा। वहीं, भारत कुछ तय संख्या (कोटा) के अंतर्गत आयात शुल्क घटाकर 10 फीसदी तक लाएगा। इटली की कार निर्माता कंपनी लेम्बॉर्गिनी को इस समझौते से अच्छा-खासा फायदा होने की उम्मीद है। लेम्बॉर्गिनी भारत में करीब 3.8 करोड़ रुपये से शुरू होने वाली कीमतों पर कारें बेचती है और अपने सभी मॉडल आयात करती है।
यूरोपीय कार मैन्युफैक्चरर और भारतीय उपभोक्ता इस समझौते की प्रगति पर लंबे समय से नजर बनाए हुए थे। साल 2007 में शुरू हुई बातचीत, ऑटो सेक्टर में शुल्क में रियायत देने को लेकर मतभेदों के कारण 2013 में रुक गई थीं।
भारत का ऑटो सेक्टर तेजी से मजबूत हो रहा है और इसी कारण भारत अब FTAs के अंतर्गत सीमित और नियंत्रित तरीके से शुल्क रियायतें दे रहा है। इससे पहले भी भारत ने ब्रिटेन की कार कंपनियों को कोटा-आधारित रियायतें दी हैं।
पीटीआई रिपोर्ट के मुताबिक, वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि EU की ऑटो क्षेत्र में मांग काफी आक्रामक थी, लेकिन भारत अपने घरेलू ऑटो इंडस्ट्री की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहा है। ऑटो सेक्टर ‘मेक इन इंडिया’ पहल का एक अहम हिस्सा है और यह बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा करता है।
उन्होंने कहा कि भारत का कार बाजार मुख्य रूप से 10 लाख से 25 लाख रुपये कीमत वाली छोटी कारों पर आधारित है, जिसमें EU की खास दिलचस्पी नहीं है। इसलिए तय किया गया है कि 25 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारें EU भारत को निर्यात नहीं करेगा। वे चाहें तो इन कारों की मैन्युफैक्चरिंग भारत में कर सकते हैं।
25 लाख रुपये से ऊपर के सेगमेंट में भारत का बाजार छोटा है, लेकिन इस हिस्से में EU का इंटरेस्ट ज्यादा है। इसी को देखते हुए, इस सेगमेंट में EU को कोटा-आधारित बाजार पहुंच दी गई है और यह कोटा अलग-अलग फेज में बढ़ेगा।
फिलहाल भारत में ऑटोमोबाइल्स पर आयात शुल्क 66 फीसदी से 125 फीसदी तक है। भारत कोटा से बाहर किसी तरह की शुल्क कटौती नहीं देगा, ताकि यूरोपीय कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर विचार करें।
इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के मामले में भारत ने अपनी घरेलू EV इंडस्ट्री को पहले पांच साल तक सुरक्षा दी है। EVs पर शुल्क रियायतें समझौते के पांचवें साल से शुरू होंगी और अलग-अलग सेगमेंट में 30–35 प्रतिशत से शुरू होकर धीरे-धीरे घटेंगी। फिलहाल, 40,000 डॉलर से कम कीमत की आयातित कारों पर भारत में 70 फीसदी, और इससे महंगी कारों पर 110 फीसदी तक प्रभावी आयात शुल्क लगता है।