Realty Stock To Buy: अमेरिका के साथ डील को लेकर चिंता के बीच घरेलू शेयर बाजारों में मंगलवार के सेशन गिरावट देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नयी टैरिफ धमकी और भारत-ईयू के बीच व्यापर समझौते की घोषणा से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच ब्रोकरेज फर्म्स ने रियल्टी सेक्टर की कंपनी डीएलएफ लिमिटेड (DLF Ltd) बुलिश आउटलुक दिया है। उनका कहना है कि मीडियम टर्म में कंपनी की पाइपलाइन मजबूती बनी हुई है।
मोतीलाल ओसवाल ने डीएलएफ लिमिटेड पर खरीदारी की सलाह बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर 974 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इस तरह, शेयर 65 फीसदी का रिटर्न दे सकता है। डीएलएफ के शेयर शुक्रवार को 588 रुपये पर बंद हुए। मंगलवार को दोपहर 3 बजे यह 609 रुपये पर ट्रेड कर रहे थे।
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ब्रोकरेज ने कहा कि नई परियोजनाओं की शुरुआत न होने और डाहलियाज से अतिरिक्त बिक्री न मिलने के कारण हमने डीएलएफ के लिए अपने अनुमान घटाए हैं। हालांकि कंपनी ने कहा है कि वह पूरे वर्ष की पूर्व-बिक्री के अपने अनुमान के अनुरूप बनी रहेगी, जो लगभग 200-220 अरब रुपये के बीच है।
ब्रोकरेज के अनुसार, कंपनी के पास मौजूद लगभग 15 करोड़ वर्ग फुट लैंड बैंक से आय हासिल करने में 12 से 13 वर्ष का समय लगेगा। इससे कंपनी की भविष्य की वृद्धि की स्पष्ट तस्वीर मिलती है।
एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग ने भी डीएलएफ पर ‘BUY‘ रेटिंग दी है। हालांकि, ब्रोकरेज ने स्टॉक पर टारगेट प्राइस 933 रुपये से घटाकर 788 रुपये कर दिया है। यह शेयर के मौजूदा भाव से 32 फीसदी ज्यादा है।
ब्रोकरेज ने कहा कि हम डीएलएफ को लेकर अब भी सकारात्मक हैं। कंपनी के पास बड़ी और बनाने लायक जमीन है। यह भूमि ऐतिहासिक लागत पर खरीदी गई है। इससे डीएलएफ को मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलती है। कंपनी की लिक्विडिटी स्थिति काफी मजबूत है। कैश सरप्लस की स्थिति साफ दिखाई देती है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीएलएफ का ब्रांड बेहद मजबूत है। यही इसकी बड़ी ताकत बनी हुई है।
रियल एस्टेट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कंपनी डीएलएफ ने वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के दौरान समेकित शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 13.6 प्रतिशत का इजाफा किया है। यह बढ़ोतरी ज्यादा शुद्ध आय और परिचालन के दमदार प्रदर्शन की बदौलत हुई है। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी ने 31 दिसंबर को खत्म तिमाही में 1,203.36 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि एक साल पहले यह 1,058.73 करोड़ रुपये था।
परिचालनगत राजस्व बढ़कर 2,020 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के 1,529 करोड़ रुपये की तुलना में 42 प्रतिशत ज्यादा है। वित्त वर्ष 26 की अक्टूबर से दिसंबर की अवधि में कंपनी की शुद्ध आय एक साल पहले के 1,737.47 करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर 2,479.54 करोड़ रुपये हो गई। नई सेल्स बुकिंग में इजाफे के कारण ऐसा हुआ, जो वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 419 करोड़ रुपये रही।
(डिस्क्लमेर: यहां शेयर में खरीदारी की सलाह ब्रोकरेज ने दी है। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश संबंधी फैसला करने से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)