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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच SME मार्केट सेंटिमेंट इंडेक्स बढ़ा, बजट से मिलेगा और सहारा

PHDCCI के एसएमई मार्केट सेंटिमेंट इंडेक्स (SMESI) के राउंड-3 के मुताबिक अक्टूबर–दिसंबर 2025 तिमाही में एसएमई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स (SME-BAI) बढ़कर 58.9 पर पहुंचा 

Last Updated- January 27, 2026 | 6:14 PM IST
SME

SME Market Sentiment Index: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय छोटे व मझौले उद्योगों (SME)के लिए हालात सकारात्मक बने हुए हैं। उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के एसएमई मार्केट सेंटिमेंट इंडेक्स (SMESI) के राउंड-3 के नतीजे बताते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के एसएमई मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग बनी हुई है और आगामी तिमाही (जनवरी–मार्च 2026) के लिए आउटलुक में सतर्क सुधार देखने को मिल रहा है। यह सुधार मुख्य रूप से आगामी केंद्रीय बजट से जुड़ी उम्मीदों के कारण है।

पिछली तिमाही में कितना रहा है SME इंडेक्स?

PHDCCI के एसएमई मार्केट सेंटिमेंट इंडेक्स (SMESI) के राउंड-3 के मुताबिक अक्टूबर–दिसंबर 2025 तिमाही में एसएमई बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स (SME-BAI) बढ़कर 58.9 पर पहुंच गया, जो पिछली तिमाही में 58.3 था। यह सूचकांक 50 के न्यूट्रल स्तर से काफी ऊपर बना हुआ है, जो विस्तार की ओर इशारा करता है। PHDCCI के अध्यक्ष राजीव जुनेजा के मुताबिक यह सुधार नए ऑर्डर में मजबूती, स्थिर उत्पादन स्तर, रोजगार की स्थिति में सुधार, सप्लायर डिलीवरी समय में नरमी और भविष्य की मांग को देखते हुए इन्वेंट्री रीस्टॉकिंग के कारण है।

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आगे कैसा रहने वाला है SME का आउटलुक

PHDCCI के एसएमई मार्केट सेंटिमेंट इंडेक्स (SMESI) के राउंड-3 के अनुसार जनवरी–मार्च 2026 के लिए एसएमई बिजनेस आउटलुक इंडेक्स (SME-BOI) मामूली बढ़कर 60.8 पर पहुंच गया, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते सतर्क रुख को दर्शाता है। सर्वे में शामिल लगभग आधे उत्तरदाताओं को निकट भविष्य में कारोबारी गतिविधियों के स्थिर रहने की उम्मीद है, हालांकि सुधार की उम्मीद जताने वालों का अनुपात राउंड-2 की तुलना में बढ़ा है। हायरिंग इंटेंशन में भी धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और अधिकांश उत्तरदाता पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं, जो मध्यम अवधि के विकास को लेकर भरोसा दिखाता है।

बजट से SME को सहारा मिलने की उम्मीद

केंद्रीय बजट से जुड़ी अपेक्षाएं सकारात्मक आउटलुक का अहम आधार बनी हुई हैं। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय पर निरंतर जोर से इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े एसएमई की मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है, खासतौर पर कृषि और उससे जुड़े मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में। बेहतर क्रेडिट सपोर्ट और उधारी लागत में संभावित कमी से एसएमई की निवेश योजनाएं मजबूत हो सकती हैं, जिससे आने वाली तिमाहियों में एसएमई बिजनेस आउटलुक इंडेक्स में और सुधार संभव है। इसके अलावा निर्यात समर्थन उपायों से मैन्युफैक्चरिंग एसएमई के लिए नए ऑर्डर बढ़ने की संभावना है। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई-चेन क्षमताओं में निवेश से बाजार तक पहुंच, उत्पादकता और रोजगार सृजन में सुधार होने की उम्मीद है।

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नए वित्तीय हेजिंग इंस्ट्रूमेंट्स डिजाइन की जरूरत

PHDCCI के सीईओ और महासचिव डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि सर्वे एसएमई में तकनीक अपनाने की रफ्तार तेज करने के लिए लक्षित प्रोत्साहनों, बेहतर आरएंडडी सपोर्ट और मजबूत डेवलपमेंट फ्रेमवर्क की जरूरत को रेखांकित करता है। एमएसएमई के लिए 45-दिन के भुगतान नियम के समयबद्ध क्रियान्वयन, मशीनरी आयात को प्रभावित करने वाले क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर की समीक्षा, बढ़ती ऊर्जा लागत और इनपुट कीमतों पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए नए वित्तीय हेजिंग इंस्ट्रूमेंट्स डिजाइन करने की भी जरूरत बताई।

First Published - January 27, 2026 | 6:11 PM IST

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