संसद का बजट सत्र बुधवार से राष्ट्रपति के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ शुरू होगा। सत्र के पहले दिन पेश करने के लिए सरकार ने मंगलवार शाम तक कोई नया विधेयक सूचीबद्ध नहीं किया था। लोक सभा सचिवालय ने नौ लंबित विधेयक सूचीबद्ध किए हैं, जिनमें दिवालियापन और दिवालिया संहिता संशोधन विधेयक तथा प्रतिभूति बाजार संहिता शामिल हैं। प्रतिभूति बाजार संहिता फिलहाल विस्तृत विचार-विमर्श के लिए वित्त मामलों की संसदीय समिति के पास है।
बजट सत्र का पहला चरण 13 फरवरी को अवकाश के लिए स्थगित होगा ताकि स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकें। बजट सत्र 9 मार्च को दोबारा आरंभ होगा और उसके बाद 2 अप्रैल तक चलेगा। कुल 65 दिन चलने वाले बजट सत्र के दौरान 30 बैठकें (पहले चरण में 13 और दूसरे चरण में 17) निर्धारित हैं।
सत्र की पूर्व संध्या पर आयोजित सर्वदलीय बैठक में संसदीय कार्य मंत्री किरण रीजीजू ने कहा कि सत्र 2026-27 के आम बजट से संबंधित वित्तीय कामों तथा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापन पर चर्चा पर केंद्रित रहेगा। जरूरी विधायी और अन्य कामकाज सत्र के दूसरे हिस्से में किए जाएंगे।
मंत्री ने कहा कि आर्थिक समीक्षा शुक्रवार को संसद में पेश की जाएगी और केंद्रीय बजट रविवार, 1 फरवरी को सुबह 11 बजे पेश किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष की उन मांगों को खारिज कर दिया जिनमें विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार ऐंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) या वीबी-जीरामजी अधिनियम तथा चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर बजट सत्र में चर्चा की बात कही गई थी। रीजीजू ने कहा कि इन दोनों मुद्दों पर शीतकालीन सत्र के दौरान पहले ही दोनों सदनों में बहस हो चुकी है और ‘हम पीछे नहीं लौट सकते।’
बैठक के दौरान कांग्रेस के जयराम रमेश और माकपा के जॉन ब्रिट्टास समेत विपक्षी सदस्यों ने सत्र के लिए सरकारी कार्यसूची वितरित न किए जाने पर आपत्ति जताई। मंत्री ने कहा कि उसे उचित समय पर पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘यह वर्ष का पहला सत्र है। सामान्यतः सरकारी कार्यसूची राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद साझा की जाती है। हालांकि, मैं सूची साझा करने के लिए तैयार हूं। मैंने अधिकारियों से इसे करने के लिए कहा है।’