उद्योग

DGCA के निर्देश के बाद इंडिगो की उड़ानों में बड़ी कटौती: स्लॉट्स खाली होने से क्या बदलेगा?

इंडिगो ने जनवरी से मार्च के बीच के लिए ये स्लॉट्स छोड़े हैं। जनवरी में 361 स्लॉट्स खाली किए गए, फरवरी में सिर्फ 43 और मार्च में फिर 361 स्लॉट्स छोड़े गए हैं

Published by
बीएस वेब टीम   
Last Updated- January 24, 2026 | 1:49 PM IST

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने देश के कई घरेलू एयरपोर्ट्स पर अपनी उड़ानों के लिए मिले तय समय यानी स्लॉट्स छोड़ दिए हैं। कुल 717 स्लॉट्स खाली किए गए हैं। यह फैसला एविएशन रेगुलेटर DGCA के निर्देश के बाद लिया गया। दिसंबर की शुरुआत में उड़ानों में भारी अव्यवस्था के बाद DGCA ने इंडिगो की विंटर फ्लाइट्स में 10 प्रतिशत कटौती का आदेश दिया था।

स्लॉट्स का मतलब किसी एयरलाइन को टेकऑफ और लैंडिंग के लिए दिया गया तय समय होता है। आसान शब्दों में कहें तो यह तय करता है कि कौन सी फ्लाइट किस समय उड़ान भरेगी या उतरेगी।

सूत्रों के मुताबिक इंडिगो ने जनवरी से मार्च के बीच के लिए ये स्लॉट्स छोड़े हैं। जनवरी में 361 स्लॉट्स खाली किए गए, फरवरी में सिर्फ 43 और मार्च में फिर 361 स्लॉट्स छोड़े गए हैं। आमतौर पर इंडिगो रोजाना 2200 से ज्यादा उड़ानें संचालित करती है, लेकिन DGCA के निर्देश के बाद सेवाओं में कटौती की गई ताकि अंतिम समय पर कैंसिलेशन रोके जा सकें और ऑपरेशनल स्थिरता बनी रहे।

छह मेट्रो एयरपोर्ट्स पर ज्यादा असर

खाली किए गए 717 स्लॉट्स में से 364 स्लॉट्स छह प्रमुख मेट्रो एयरपोर्ट्स से हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें सबसे ज्यादा स्लॉट्स हैदराबाद और बेंगलुरु एयरपोर्ट्स से छोड़े गए हैं।

इंडिगो ने इन स्लॉट्स की पूरी सूची नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सौंप दी है। इसके बाद मंत्रालय ने अन्य एयरलाइंस से कहा है कि वे इन खाली स्लॉट्स पर घरेलू उड़ानें संचालित करने के लिए अपने आवेदन जमा करें, ताकि ये समय खाली न जाए।

Also Read: IndiGo Q3 Results: नई श्रम संहिता और उड़ान रद्द होने का असर: इंडिगो का मुनाफा 78% घटकर 549 करोड़ रुपये

हालांकि एविएशन इंडस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि ये स्लॉट्स केवल मार्च के अंत तक के लिए उपलब्ध हैं। इसके बाद ये स्लॉट्स वापस इंडिगो को मिल सकते हैं। इतने कम समय के लिए कोई भी एयरलाइन नया रूट शुरू नहीं करती, क्योंकि नेटवर्क प्लानिंग में काफी समय लगता है।

दिसंबर में भारी अव्यवस्था और DGCA की कार्रवाई

पिछले साल 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो ने 2507 उड़ानें रद्द की थीं और 1852 उड़ानें देरी से चली थीं। इससे देशभर के एयरपोर्ट्स पर तीन लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए थे। इस अव्यवस्था के बाद DGCA ने इंडिगो के विंटर शेड्यूल में 10 प्रतिशत कटौती कर दी।

विंटर शेड्यूल 2025 26 के तहत इंडिगो को प्रति सप्ताह 15014 उड़ानें संचालित करने की अनुमति मिली थी, जो रोजाना 2144 उड़ानों के बराबर है। 10 प्रतिशत कटौती के बाद यह संख्या घटकर करीब 1930 घरेलू उड़ानें प्रतिदिन रह गई। तुलना करें तो समर शेड्यूल में इंडिगो औसतन 2022 उड़ानें रोजाना संचालित करती थी।

DGCA ने 17 जनवरी को दिसंबर की अव्यवस्था को लेकर इंडिगो पर कुल 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही कंपनी के सीईओ पीटर एल्बर्स और दो अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को चेतावनी दी गई। एयरलाइन को 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने का भी निर्देश दिया गया, ताकि भविष्य में सिस्टम सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

20 जनवरी को जारी DGCA की रिपोर्ट में कहा गया कि यह अव्यवस्था फ्लाइट क्रू की कमी, ऑपरेटर स्तर पर रेगुलेटरी तैयारी की कमजोरी, सिस्टम सॉफ्टवेयर की खामियों और ऑपरेशनल कंट्रोल में कमियों की वजह से हुई थी।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की समिति ने 13 जनवरी को स्लॉट्स के पुनर्वितरण को लेकर पहली बैठक की थी। इसके बाद एयरलाइंस से कहा गया है कि वे संबंधित एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को अपनी प्राथमिकताएं भेजें। शर्त यह रखी गई है कि कोई भी एयरलाइन इन स्लॉट्स का उपयोग करने के लिए अपने मौजूदा रूट्स बंद नहीं करेगी।

इंडस्ट्री से जुड़े एक अन्य अधिकारी के अनुसार, ज्यादातर खाली स्लॉट्स देर रात या सुबह जल्दी चलने वाली उड़ानों के हैं, जिन्हें रेड आई फ्लाइट्स कहा जाता है। आमतौर पर इन उड़ानों में मांग कम होती है, इसलिए दूसरी एयरलाइंस इनमें ज्यादा रुचि नहीं दिखा रही हैं।

(PTI के इनपुट के साथ)

First Published : January 24, 2026 | 1:49 PM IST