अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया गया 25 फीसदी का टैरिफ हटाने का एक रास्ता निकल सकता है। उन्होंने पॉलिटिको को दिए इंटरव्यू में बताया कि हाल के महीनों में भारत ने रूसी क्रूड ऑयल की खरीदारी काफी कम कर दी है, जिससे ये टैरिफ अब हटाने लायक हो सकता है।
बेसेंट ने इसे ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति की कामयाबी बताया। उन्होंने कहा, “हमने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए 25 फीसदी टैरिफ लगाया था और अब भारतीय रिफाइनरियों की रूसी तेल की खरीदारी लगभग खत्म हो गई है। ये एक बड़ी सफलता है।”
उनके मुताबिक, टैरिफ अभी भी लागू हैं, लेकिन अब इन्हें हटाने पर विचार किया जा सकता है।
यूक्रेन युद्ध से पहले भारत के रिफाइनरियों में रूसी क्रूड का हिस्सा सिर्फ 2-3 फीसदी था। लेकिन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के सैंक्शन की वजह से रूस ने तेल बहुत सस्ते दामों पर बेचना शुरू किया। इससे भारत ने रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी और ये हिस्सा हाई टीन (15-19 फीसदी) तक पहुंच गया। इससे भारतीय रिफाइनरियों को अच्छा मुनाफा भी हुआ।
लेकिन अमेरिका ने ट्रंप प्रशासन में ये टैरिफ लगाकर भारत को रूसी तेल से दूर करने की कोशिश की। बेसेंट के अनुसार, अब भारतीय रिफाइनरियां रूसी सप्लाई कम करके पश्चिमी एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से ज्यादा तेल ले रही हैं।
बेसेंट ने यूरोपीय देशों की भी खिंचाई की। उन्होंने कहा कि यूरोप वाले एक तरफ रूस के खिलाफ बोलते हैं, लेकिन दूसरी तरफ भारतीय रिफाइनरियों से बने रिफाइंड प्रोडक्ट्स खरीदते हैं, जो रूसी क्रूड से बने होते हैं। इससे यूरोप अनजाने में रूस की जंग को फंडिंग दे रहा है। उन्होंने इसे ‘व्यंग्य और मूर्खता’ का काम बताया।
भारत की तरफ से हमेशा यही रुख रहा है कि तेल की खरीदारी पूरी तरह ग्लोबल मार्केट और मौजूदा हालात पर निर्भर करती है।