प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
निजी क्षेत्र का ऋणदाता इंडसइंड बैंक वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में मुनाफे में लौट आया लेकिन उसका शुद्ध लाभ 91 फीसदी घटकर 128 करोड़ रुपये रह गया। प्रावधान एवं आकस्मिक मद में अधिक रकम और शुद्ध ब्याज एवं गैर-ब्याज आय कम रहने से मुनाफे को झटका लगा। बैंक ने इससे पिछली तिमाही में 437 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया था।
बैंक ने कहा कि सुनील मेहता 30 जनवरी को अपना कार्यकाल पूरा होने पर अंशकालिक अध्यक्ष एवं निदेशक पद पर नहीं रहेंगे क्योंकि वह अपने कार्यकाल में विस्तार नहीं चाहते हैं। बैंक ने अरिजित बसु को इस पद पर नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 31 जनवरी से प्रभावी होगा। बसु एचडीबी फाइनैंशियल सर्विसेज में चेयरमैन एवं गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक के रूप में कार्यरत थे और उन्होंने तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे दिया है।
तिमाही के दौरान बैंक की शुद्ध ब्याज आय एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 13 फीसदी घटकर 4,562 करोड़ रुपये रह गई, क्योंकि ऋण खाता एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 13 फीसदी और क्रमिक रूप से 3 फीसदी घटकर 3.17 लाख करोड़ रुपये रह गया। बैंक का थोक ऋण खाता सालाना आधार पर 28 फीसदी घटकर 1.12 लाख करोड़ रुपये रह गया। बड़े कॉरपोरेट पोर्टफोलियो में 40 फीसदी की गिरावट आई।
इंडसइंड बैंक के एमडी एवं सीईओ राजीव आनंद ने कहा, ‘परिसंपत्ति के मामले में वाहन फाइनैंस, खुदरा एवं कॉरपोरेट ऋण वितरण दमदार रहा। मगर हमारे औसत ऋण खाते में 2 फीसदी की गिरावट आई और इसकी वजह सूक्ष्म ऋण श्रेणी में गिरावट है।’
आनंद ने कहा कि बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 में बाजार के अनुरूप वृद्धि दर्ज करने और अगले 12 से 18 महीनों में परिसंपत्ति पर रिटर्न 1 फीसदी हासिल करने का लक्ष्य है। बैंक वाणिज्यिक वाहन ऋण, माइक्रोफाइनैंस, एमएसएमई आदि पर भी ध्यान केंद्रित करेगा। तिमाही के दौरान बैंक की अन्य स्रोतों से प्राप्त आय 28 फीसदी घटकर 1,707 करोड़ रुपये रह गई।
दिलचस्प है कि बैंक ने अपने शुद्ध ब्याज मार्जिन में सुधार ऐसे समय में दर्ज किया है जब रिजर्व बैंक द्वारा दरों में कटौती की घोषणा किए जाने के बाद अन्य बैंकों के शुद्ध ब्याज मार्जिन में गिरावट आई है। तिमाह के दौरान बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन एक तिमाही पहले के मुकाबले 20 आधार अंक बढ़कर 3.52 फीसदी हो गया। प्रावधान एवं आकस्मिक मद की रकम 20 फीसदी बढ़कर 2,096 करोड़ रुपये हो गई, लेकिन एक तिमाही पहले के मुकाबले इसमें 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
तिमाही के दौरान सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) 4 आधार अंक घटकर 3.56 फीसदी रह गईं। शुद्ध एनपीए 1.04 फीसदी रहा। जमा एक साल पहले के मुकाबले 4 फीसदी घटकर 3.93 लाख करोड़ रुपये रह गई।