शेयर बाजार

अमीर निवेशकों की पसंद बने AIF, निवेश प्रतिबद्धता 16 लाख करोड़ रुपये के पार

सेबी के आंकड़ों के अनुसार, एआईएफ द्वारा निवेश में पिछले वर्ष की तुलना में 27 फीसदी की वृद्धि हुई और दिसंबर 2025 तक यह 6.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया

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खुशबू तिवारी   
Last Updated- January 23, 2026 | 10:52 PM IST

शेयर बाजार में सुस्ती के बावजूद धनी निवेशकों के बीच वैकल्पिक निवेश फंड (एआईएफ) लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। दिसंबर 2025 तक इनमें निवेश की प्रतिबद्धता करीब 16 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 20 फीसदी अधिक है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों के अनुसार, एआईएफ द्वारा निवेश में पिछले वर्ष की तुलना में 27 फीसदी की वृद्धि हुई और दिसंबर 2025 तक यह 6.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि स्थापना के बाद से जुटाई गई कुल धनराशि 6.78 लाख करोड़ रुपये रही।

आम तौर पर फंड मैनेजर किश्तों में निवेश लेते हैं और यह राशि धीरे-धीरे जुटाई गई धनराशि में दिखाई देती है। एआईएफ (परिचित निवेशकों के लिए डिजायन किए गए सामूहिक निवेश साधन) में न्यूनतम निवेश सीमा 1 करोड़ रुपये है। हालांकि मान्यता प्राप्त निवेशकों को इससे कम राशि का निवेश करने की अनुमति है। ये फंड बुनियादी ढांचे, एमएसएमई, स्टार्टअप और श्रेणी-3 एआईएफ के मामले में जटिल ट्रेडिंग रणनीतियों समेत विभिन्न प्रकार की संपत्तियों में निवेश करते हैं।

यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स के संस्थापक और प्रबंध भागीदार तथा आईवीसीए के वीसी परिषद सदस्य अनिल जोशी ने कहा, अब तक एआईएफ में करीब 75 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जा चुका है, जो पीई, रियल एस्टेट, निजी ऋण और वीसी में स्थिर पूंजी निकासी और निवेश को दर्शाता है। श्रेणी-2 एआईएफ व्यापक निवेश दायरे के कारण इकोसिस्टम पर हावी हैं और प्रतिबद्धताओं और निवेशों का बड़ा हिस्सा इन्हीं के पास है।

घरेलू भागीदारी मजबूत बनी हुई है, लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा एआईएफ में निवेश में पिछले दो वर्षों में भारी गिरावट आई है, जो व्यापक शेयर बाजार से हो रही निकासी को दर्शाती है। एफपीआई द्वारा जुटाई गई कुल धनराशि मार्च 2024 में 18,426 करोड़ रुपये से घटकर दिसंबर 2025 तक 1,196 करोड़ रुपये रह गई। इसके विपरीत, इसी अवधि में प्रवासी भारतीयों का योगदान तेजी से बढ़ा और यह 15,106 करोड़ रुपये से बढ़कर 24,288 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। 

ध्रुव एडवाइजर्स के पार्टनर पुनीत शाह ने कहा, विदेशी निवेशकों (एफआईआई) के निवेश के लिए बढ़ते भू-राजनीतिक सीमा पार तनाव और शेयर बाजार के सुस्त प्रदर्शन के कारण घरेलू निवेशकों (विशेष रूप से गैर-सूचीबद्ध शेयरों में) एआईएफ की स्वीकार्यता बढ़ रही है। इसके अलावा, बाजार नियामक द्वारा एआईएफ के लिए नियामक उदारीकरण ने भी भागीदारी बढ़ाने में मदद की है।

First Published : January 23, 2026 | 10:40 PM IST