अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की तीखी रिपोर्ट गौतम अदाणी समूह के लिए सबसे अधिक उथल-पुथल वाली घटनाओं में से एक है। इस रिपोर्ट के कारण समूह के बाजार मूल्यांकन को 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक की चोट पहुंची। नियामकीय, राजनीतिक और निवेशक जांच शुरू हुई।
रिपोर्ट से पहले अदाणी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार पूंजीकरण करीब 23 लाख करोड़ रुपये था। शॉर्ट सेलर्स के अकाउंटिंग की गड़बड़ियों, अत्यधिक कर्ज और अपारदर्शी विदेशी स्वामित्व संरचनाओं के आरोपों के बाद यह घटकर 6.82 लाख करोड़ रुपये रह गया था। समूह के शेयरों को लगातार बिकवाली, मार्जिन कॉल और सूचकांक पुनर्संतुलन के दबाव का सामना करना पड़ा था।
अगले वर्ष परिचालन प्रदर्शन में सुधार, वैश्विक निवेशकों के समर्थन और कर्ज में कमी के कारण कंपनी ने सकारात्मक वापसी की। समूह ने अपनी बैलेंस शीट मजबूत करने के लिए कर्ज में भारी कटौती की, कर्ज का समय से पहले भुगतान किया और पूंजीगत व्यय को धीमा कर दिया।
प्रवर्तकों ने नई इक्विटी का निवेश किया जबकि जीक्यूजी पार्टनर्स सहित प्रमुख वैश्विक निवेशकों ने बड़ी हिस्सेदारी खरीदी और अहम मोड़ पर विश्वसनीयता मुहैया कराई। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति को नियामकीय विफलता के कोई ठोस सबूत नहीं मिले, जिससे प्रणाली में गड़बड़ी की आशंकाएं कम हुईं। इसके बाद, बाजार नियामक सेबी ने भी समूह को संबंधित पक्षकार लेनदेन (आरपीटी) नियम के कथित उल्लंघन और भेदिया कारोबार से जुड़े दो महत्त्वपूर्ण मामलों में क्लीन चिट दे दी।
बंदरगाहों, हवाई अड्डों, विद्युत पारेषण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे प्रमुख व्यवसायों से मजबूत नकदी प्रवाह ने बाजार के मनोबल को स्थिर करने में और मदद की। 3 जून, 2024 तक समूह का बाजार पूंजीकरण बढ़कर करीब 19.43 लाख करोड़ रुपये हो गया था।
हालांकि, इसके बाद से तेजी की रफ्तार धीमी पड़ गई है और समूह का मूल्यांकन 35 फीसदी गिरकर 12.7 लाख करोड़ रुपये रह गया है। दोबारा आई गिरावट के कई कारण हैं : तेज उछाल के बाद मुनाफावसूली, कर्ज को लेकर लगातार चिंताएं और वैश्विक जोखिम से जुड़ी संवेदनशीलता।
शुक्रवार को हुई ताज़ा बिकवाली की वजह अमेरिकी मार्केट रेगुलेटर एसईसी का वह कदम है, जिसमें उसने कथित धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी योजना के मामले में संस्थापक गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी को सीधे ईमेल से समन भेजने के लिए कोर्ट से इजाज़त मांगी है।