प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
जेएसडब्ल्यू स्टील ने वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में अपने समेकित शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 198.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की और यह बढ़कर 2,139 करोड़ रुपये हो गया। भूषण पावर ऐंड स्टील (बीपीएसएल) और जेएफई स्टील के सौदों से जुड़े एक मुश्त कर लाभ के कारण हुआ यह इजाफा हुआ। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ 717 करोड़ रुपये था।
3 दिसंबर को जेएसडब्ल्यू स्टील ने बीपीएसएल के स्टील कारोबार के लिए जापान की जेएफई स्टील के साथ रणनीतिक संयुक्त उद्यम का ऐलान किया था। इस लेनदेन के तहत जेएफई बीपीएसएल के स्टील कारोबार में 31,500 करोड़ रुपये के इक्विटी मूल्य और 53,000 करोड़ रुपये के उद्यम मूल्य पर 50 प्रतिशत हिस्सेदारी लेगी।
समायोजित आधार पर कंपनी का कुल राजस्व पिछले साल के 41,378 करोड़ रुपये की तुलना में 11.1 प्रतिशत बढ़कर 45,991 करोड़ रुपये हो गया। राजस्व और शुद्ध लाभ दोनों ही ब्लूमबर्ग के अनुमानों से आगे निकल गए। इसमें राजस्व 44,514.6 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ 1,457.3 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था।
तिमाही आधार पर राजस्व में 1.9 प्रतिशत और शुद्ध लाभ में 31.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कंपनी का समेकित समायोजित एबिटा 6,620 करोड़ रुपये रहा। इसमें सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसमें मुख्य रूप से अधिक वॉल्यूम तथा कोकिंग कोल और बिजली की कम लागत से इजाफा हुआ, जिसे कुछ हद तक कम आमदनी ने संतुलित कर दिया।
जेएसडब्ल्यू स्टील ने कहा कि निदेशक मंडल ने ओडिशा के जगतसिंहपुर में अपने नए कार्य स्थल पर सालाना 50 लाख टन वाले स्टील संयंत्र को मंजूरी दे दी है। इसकी सहायक कंपनी जेएसडब्ल्यू उत्कल स्टील लिमिटेड के तहत इस परियोजना में 31,600 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया जाएगा और इसे वित्त वर्ष 30 तक चालू कर दिया जाएगा।
नियामकीय सूचना में जेएसडब्ल्यू स्टील ने कहा कि निदेशक मंडल ने एक संयुक्त उद्यम वाली कंपनी बनाने को भी मंजूरी दी है। इसमें कंपनी के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी पेद्दार रियल्टी लिमिटेड भूमि विकास परियोजना के लिए जेएसडब्ल्यू रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड (जेएसडब्ल्यू आरपीएल) और अन्य साझेदारों के साथ 51 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेगी।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत की तीसरी सबसे बड़ी दवा कंपनी सिप्ला का शुद्ध लाभ समेकित आधार पर एक साल पहले की तुलना में 57 फीसदी घटकर 675 करोड़ रुपये रह गया। परिचालन से राजस्व 7,074 करोड़ रुपये पर सपाट बना रहा। तिमाही आधार पर शुद्ध लाभ 50 फीसदी तक घट गया।
मुनाफे में कमी अमेरिका में लैनरियोटाइड की आपूर्ति संबंधित समस्याएं और लेनालिडोमाइड के न्यूनतम योगदान के कारण हैं। लैनरियोटाइड का इस्तेमाल कुछ न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर के इलाज में किया जाता है। कंपनी ने कहा कि लेनालिडोमाइड से होने वाला राजस्व उम्मीद के मुताबिक कमजोर रहेगा, लेकिन इसकी भरपाई नई पेशकशों से हो सकेगी, खासकर अमेरिकी बाजार में कॉम्पलेक्स रेस्पिरेटरी दवाओं, पेप्टाइड्स और इंजेक्टेबल्स की मदद से।
सिप्ला के एमडी और ग्लोबल सीईओ (नामित) अचिन गुप्ता ने कहा, ‘हमें तिमाही के दौरान कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हमारे प्रमुख उत्पादों में से एक लैनरियोटाइड हमारे भागीदार फार्माथेन के यूएस एफडीए ऑडिट के बाद आपूर्ति की किल्लत से प्रभावित हुआ। हम समस्याएं दूर करने पर काम कर रहे हैं और वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में आपूर्ति फिर शुरू होने की उम्मीद है। इस बीच, मौजूदा लॉट की निकासी के आधार पर उत्पाद की सीमित आपूर्ति होगी। हम अपने भागीदार के साथ एक वैकल्पिक निर्माण इकाई को सक्षम बनाने पर भी विचार कर रहे हैं।’
अदाणी ग्रीन एनर्जी का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में लगभग 98.94 प्रतिशत घटकर पांच करोड़ रुपये रहा। मुख्य रूप से खर्च बढ़ने के कारण कंपनी का लाभ घटा है। कंपनी ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि पिछले वर्ष की समान तिमाही (दिसंबर 2024) में उसने 474 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ दर्ज किया था। आलोच्य तिमाही के दौरान कंपनी का कुल खर्च बढ़कर 2,961 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले इसी तिमाही में 2,329 करोड़ रुपये था। वित्तीय लागत भी पिछले साल के 1,251 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,698 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, तिमाही के दौरान कुल आय बढ़कर 2,837 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल 2,636 करोड़ रुपये थी।