प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) इस समय प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर गहन बातचीत कर रहे हैं। इसमें पर्यावरण संरक्षण जैसे कठिन मुद्दे भी शामिल हैं। दोनों पक्षों ने 27 जनवरी को नई दिल्ली में भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में वार्ता के निष्कर्ष की घोषणा करने का लक्ष्य रखा है।
यूरोपीय संघ के एक अधिकारी ने कहा कि वार्ता समाप्त होने के बाद दोनों पक्ष समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में बढ़ने से पहले अपनी आंतरिक अनुमोदन प्रक्रियाओं का पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य दोनों तरफ से ‘शुल्क में पर्याप्त कमी’ करना है।
प्रस्तावित व्यापार समझौते को व्यापार के विविधीकरण और आपूर्ति के सीमित स्रोतों को व्यापक बनाने के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही निवेश को बढ़ावा देना और प्रमुख क्षेत्रों में औद्योगिक सहयोग भी शामिल है, जिसमें एक्टिव फॉर्मास्यूटिकल्स इनग्रेडिएंट्स (एपीआई), सौर उपकरण और हाइड्रोजन शामिल है। अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्ष संयुक्त रूप से औद्योगिक क्षमता का निर्माण करना और निर्भरता को कम करना चाहते हैं।
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यूरोपीय संघ के अधिकारी ने कहा, ‘यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दावोस में भी कहा कि हम एक समझौते के करीब पहुंच रहे हैं, और यह इन वार्ताओं को शुरू करने के 20 से अधिक वर्षों बाद हो रहा है। मर्कोसुर के साथ (समझौते) के बाद यह एक और बड़ा और बहुत रणनीतिक समझौता होगा।’
उन्होंने कहा, ‘भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक क्षेत्रों में से एक होगा और इससे लगभग 2 अरब लोगों का बाजार बनेगा। इससे कंपनियों की बाजार तक पहुंच में सुधार होगा और कारोबार को समर्थन मिलेगा और रोजगार का सृजन होगा। इससे आपूर्ति श्रृंखला में विविधीकरण लाने और अवांछित निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।’