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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के मार्च के अंत तक भारत यात्रा पर आने की संभावना है। इस बीच कनाडा के विश्वविद्यालयों की प्रतिनिधि संस्था यूनिवर्सिटीज कनाडा ने घोषणा की है कि देश भर से 21 विश्वविद्यालयों के प्रेसिडेंट फरवरी के पहले सप्ताह में भारत का दौरा करेंगे।
कार्नी की भारत यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में नए सिरे से सुधार के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों ने व्यापार समझौते को लेकर नए सिरे से वार्ता आरंभ की है और फिलहाल वे उसके दायरे के बारे में चर्चा कर रहे हैं।
यूनिवर्सिटीज कनाडा की ओर से कहा गया, ‘कनाडा सरकार की हालिया घोषणा जिसमें कनाडा-भारत संबंधों में नए उत्साह और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते की दिशा में वार्ताएं शुरू करने पर प्रकाश डाला गया है, उसके बाद यूनिवर्सिटीज कनाडा को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि वह 2 से 6 फरवरी तक अपने अध्यक्षों का एक देशव्यापी प्रतिनिधिमंडल भारत ले जाएगी।’
उसने कहा कि यह मिशन भारत-कनाडा शोध सहयोग को आगे बढ़ाएगा और उद्योग के साथ साझेदारी का विस्तार करेगा। उसने यह भी कहा, ‘यह मिशन कनाडा के संघीय बजट में हाल ही में घोषित 1.7 अरब डॉलर की शोध और प्रतिभा रणनीति पर आधारित है और अक्टूबर 2025 में घोषित कनाडा-भारत संबंधों के नए रोडमैप को आगे बढ़ाता है, जो दोनों देशों के बीच नवीनीकृत साझेदारी की ओर बढ़ते उत्साह को दर्शाता है।’
कनाडा के 21 विश्वविद्यालयों के प्रेसिडेंट भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी लोगों, गोवा, नई दिल्ली और गुजरात सरकार और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों तथा गुजरात गिफ्ट सिटी (गुजरात इंटरनैशनल फाइनैंस टेक-सिटी) के लोगों से मिलेंगे और शोध सहयोग, अकादमिक आदान-प्रदान आदि की संभावनाएं तलाशेंगे।
वक्तव्य में भारत में कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर के हवाले से कहा गया कि भारत और कनाडा के बीच शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग का लंबा इतिहास है। उन्होंने कहा कि कनाडा के विश्वविद्यालयों के प्रेसिडेंट्स की यह भारत यात्रा शोध और शिक्षा के क्षेत्र में नए सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के पटनायक ने कहा, ‘शिक्षा भारत-कनाडा साझेदारी की बुनियाद है, जो आम जनता के बीच संबंधों को मजबूत करती है और शोध, नवाचार तथा सतत विकास में सहयोग को आगे बढ़ाती है। कनाडाई विश्वविद्यालय प्रेसिडेंट्स की यात्रा शैक्षणिक सहयोग को गहरा करने और भारत-कनाडा सहयोग को बढ़ाने के लिए एक दूरदर्शी एजेंडा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।’
मंगलवार को दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर अपने संबोधन में कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने के प्रयास में चीन और भारत के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध बनाने के लिए उत्सुक है। कार्नी ने इस महीने की शुरुआत में चीन का दौरा किया था। पिछले वर्ष अपने देश के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद से भारत-कनाडा संबंधों में सुधार देखा गया है।
कार्नी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर में जोहान्सबर्ग में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की। बैठक के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर वार्ता शुरू करेंगे, जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
भारत ने ग्रेटर कनाडियन पेंशन फंड्स को भारत आमंत्रित किया और दोनों देशों के बीच 2.8 अरब डॉलर मूल्य के यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के समझौते पर बातचीत चल रही है। दोनों देश परमाणु सहयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं।