प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का सिलसिला थम नहीं रहा है। लगातार विदेशी निकासी और आयातकों की डॉलर मांग की वजह से आज रुपया 91.96 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर आ गया। डॉलर के मुकाबले 0.36 फीसदी की गिरावट के साथ रुपया सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा रही। गुरुवार को यह 91.62 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।
एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, ‘विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश निकालने और आयातकों की डॉलर मांग के कारण रुपया जल्द ही डॉलर के मुकाबले 93 के स्तर को पार कर सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रुपये की गिरावट को थामने के लिए वायदा और हाजिर दोनों में दखल दे रहा है लेकिन काफी कम मात्रा में।’
बाजार के भागीदारों ने कहा कि निर्यातक सतर्क हैं क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत रुकी हुई है जिससे डॉलर की आमद कम हो रही है। साथ ही विदेशी निवेशक शेयर बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। बढ़ते चालू खाता घाटे से भी रुपये पर दबाव पड़ रहा है।
आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा, ‘डॉलर में विशेष मजबूती नहीं है मगर रुपये के खराब प्रदर्शन से पता चलता है कि आरबीआई संयमित तरीके से मुद्रा बाजार में सीमित दखल दे रहा है।’ डॉलर इंडेक्स 98.33 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 98.37 पर स्थिर रहा। यह छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है। दिसंबर 2025 तक रुपये में वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) 95.20 रही जो नवंबर में 97.52 थी।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘रुपया और कमजोर होकर 93 प्रति डॉलर के स्तर की ओर बढ़ता दिख रहा है क्योंकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक डॉलर खरीदना जारी रखे हुए हैं। घबराए हुए आयातक भी बिना फॉरवर्ड निर्यात बिक्री के डॉलर खरीद रहे हैं क्योंकि निर्यातक रुपये में आगे और गिरावट की उम्मीद में डॉलर होल्ड कर रहे हैं।’ चालू वित्त वर्ष में रुपये में अभी तक डॉलर के मुकाबले 7.05 फीसदी की गिरावट आई है जबकि इस साल अभी तक इसमें 2.26 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।