भारत के प्रतिभूति नियामक-सेबी ने पीडब्ल्यूसी और ईवाई की स्थानीय इकाइयों के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों और अन्य पर भेदिया कारोबार से जुड़े नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। एक नियामकीय नोटिस के अनुसार इन लोगों ने 2022 में येस बैंक की शेयर बिक्री से जुड़े भेदिया कारोबार के नियमों का उल्लंघन किया।
रॉयटर्स ने यह नोटिस देखा है। इसके अनुसार भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्मों कार्लाइल ग्रुप और एडवेंट इंटरनैशनल के अधिकारियों पर भी सौदे से संबंधित अप्रकाशित मूल्य संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप लगाया है, जो इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन है। एडवेंट, कार्लाइल, ईवाई, पीडब्ल्यूसी, यस बैंक और सेबी ने इस बारे में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया है।
नवंबर में जारी नोटिस, जिसकी पहले खबर नहीं आई और जो सार्वजनिक नहीं है, में आरोप लगाया गया है कि पीडब्ल्यूसी और ईवाई के दो अधिकारियों और परिवार के पांच अन्य सदस्यों और दोस्तों ने यस बैंक के 2022 के शेयर प्रस्ताव से पहले उसके शेयरों में कारोबार करके गैर-कानूनी तरीके से लाभ कमाया। अधिकांश आरोपी अभी भी अपनी-अपनी फर्मों में कार्यरत हैं।
सेबी के नोटिस से पता चला है कि कार्लाइल, एडवेंट, पीडब्ल्यूसी और ईवाई के भारतीय अधिकारियों ने शेयर भाव पर असर डालने वाली अप्रत्याशित जानकारी साझा की, जिससे दूसरों ने इस जानकारी के आधार पर कारोबार किया। उसने येस बैंक के एक पूर्व बोर्ड सदस्य पर भी इस तरह की जानकारी साझा करने का आरोप लगाया, जिससे दूसरों को कारोबार संबंधित फायदा हुआ।
नियामक का नोटिस जुलाई, 2022 में यस बैंक के शेयरों में हुई गतिविधियों की जांच के बाद आया है, जिसमें कार्लाइल और एडवेंट ने संयुक्त रूप से 1.1 अरब डॉलर में 10 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। 29 जुलाई, 2022 को सौदे की घोषणा के एक दिन बाद बैंक का शेयर 6 फीसदी ऊपर खुला था।
जांच से जुड़े दो लोगों ने मामले की संवेदनशीलता के कारण नाम नहीं छापे जाने के अनुरोध के साथ कहा कि आरोपी व्यक्ति अपनी कंपनियों के साथ सेबी के नोटिस का जवाब तैयार कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद कारण बताओ नोटिस सेबी का पहला कदम होता है और इसका उद्देश्य आरोपी व्यक्तियों और संस्थाओं से जवाब मांगना है। अगर यह बरकरार रहता है, तो उन्हें भारतीय प्रतिभूति नियमों के तहत मौद्रिक दंड या प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।