भारत सरकार अगले महीने से नई तिमाही राष्ट्रीय लेखा (QNA) सीरीज शुरू करने वाली है। इसमें GDP के आंकड़ों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए कई नए डेटा सोर्स जोड़े गए हैं। जैसे कि GDP का कुल डेटा, जो सामान, सेवाओं और बिजनेस के प्रकार के हिसाब से बांटा गया है। साथ ही ई-वाहन का डेटा और प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल का डेटा भी शामिल होगा। ये सब एक बड़े बदलाव का हिस्सा हैं, जहां GDP की गणना अब 2022-23 को बेस ईयर मानकर की जाएगी। ये नई GDP सीरीज 27 फरवरी 2026 को जारी होगी।
सांख्यिकी मंत्रालय ने शुक्रवार को एक चर्चा पत्र में बताया कि इन नए सोर्स से उन सेक्टरों के अनुमान बेहतर होंगे जहां पहले तेजी से बदलते आंकड़े उपलब्ध नहीं थे। साथ ही हर संस्थागत सेक्टर की डिटेल ज्यादा साफ-सुथरी आएगी। इससे अर्थव्यवस्था की तस्वीर ज्यादा साफ दिखेगी, खासकर छोटी-छोटी तिमाहियों में।
पुरानी 2011-12 वाली सीरीज में सालाना और तिमाही आंकड़ों के बीच अक्सर गड़बड़ी आ जाती थी, जो शॉर्ट-टर्म एनालिसिस और मौसमी बदलावों को मुश्किल बना देती थी। अब नई सीरीज में IMF के 2017 क्वार्टरली नेशनल अकाउंट्स मैनुअल की सिफारिशों को अपनाया जाएगा। पुरानी प्रो राटा मेथड की जगह प्रोपोर्शनल बेंचमार्किंग आएगी।
खासतौर पर सेक्टर-वाइज मूल्यांकन के आधार पर प्रोपोर्शनल डेंटन मेथड इस्तेमाल होगा। ये एक मजबूत तकनीक है जो महीने या तिमाही के तेज आंकड़ों को सालाना सटीक आंकड़ों से मैच कराती है। साथ ही इंडिकेटर सीरीज के पीरियड-टू-पीरियड ग्रोथ रेट को बचाकर रखती है। मंत्रालय का कहना है कि इससे तिमाही सीरीज में बनावटी गड़बड़ियां नहीं आएंगी और इंडिकेटर्स की असली हलचल बनी रहेगी। ये बदलाव शॉर्ट-टर्म प्लानिंग के लिए काफी फायदेमंद साबित होंगे।
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उत्पादन वाले हिस्से में कई सुधार हो रहे हैं। कृषि के लिए अब विस्तारित फसल उत्पादन डेटा से वॉल्यूम एक्सट्रापोलेशन किया जाएगा। मैन्युफैक्चरिंग में आउटपुट और इनपुट थोक मूल्य सूचकांक से डबल डिफ्लेशन आएगा, जो पुरानी सिंगल डिफ्लेशन से अलग है। साथ ही वार्षिक उद्योग सर्वे से अपडेटेड वेट्स यूज होंगे। बैंकिंग सेक्टर के लिए फाइनेंशियल इंटरमीडिएशन सर्विसेज को तिमाही लोन-डिपॉजिट रेट्स से मापा जाएगा।
ये बदलाव GDP की गणना को ज्यादा रियल टाइम और सटीक बनाएंगे, क्योंकि पुराने तरीकों में कई कमियां थीं।
मांग वाले हिस्से में तिमाही प्राइवेट कंजम्प्शन को नीचे से ऊपर बनाया जाएगा। इसमें COICOP 2018 क्लासिफिकेशन, लेटेस्ट घरेलू उपभोक्ता व्यय सर्वे, और GDP, IIP, बिजली-गैस-रेलवे का प्रशासनिक डेटा, प्लस ई-वाहन डेटा शामिल होगा। ये सालाना प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर के कुल डिफ्लेशन पर निर्भर नहीं रहेगा।
राज्यों के लिए GSDP में भी अपग्रेड होगा। उत्पादन और आय अप्रोच पर फोकस रहेगा, लेकिन तरीका ज्यादा लचीला बनेगा। गैर-वित्तीय प्राइवेट कंपनियों की सेवाओं में राज्य हिस्सेदारी अब GDP आउटवर्ड सप्लाइज से आएगी, न कि फिक्स्ड बेस-ईयर रेशियो से। इससे रियल टाइम डायनामिज्म आएगा। कंस्ट्रक्शन GVA में HSN और SAC के हिसाब से GDP डेटा यूज होगा, जो कंस्ट्रक्शन से जुड़े सामानों पर आधारित होगा। पुराने सीमेंट और स्टील कंजम्प्शन जैसे कॉम्पोजिट इंडिकेटर्स की जगह ये आएंगे।