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Budget 2026: कैपेक्स और रोजगार पर जोर, टैक्स कलेक्शन व विनिवेश बने रहेंगे चुनौती

सर्वे में शामिल लोगों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भू-राजनीतिक जोखिम, रोजगार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रमुख चुनौतियों के रूप में भी चिन्हित किया है

Last Updated- January 23, 2026 | 7:07 PM IST
budget 2026

Budget 2026: वित्त वर्ष 2027 के लिए केंद्रीय बजट में पूंजीगत व्यय (capital expenditure), राजकोषीय अनुशासन (fiscal consolidation) और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने वाले सुधारों (growth-supportive reforms) पर जोर बने रहने की संभावना है। भले ही सरकार कमजोर टैक्स कलेक्शन और सुस्त विनिवेश प्राप्तियों की चुनौती का सामना कर रही है। केयरएज रेटिंग्स ने अपनी एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी।

कहां पर होगा बजट का फोकस?

1. आगामी केंद्रीय बजट में रोजगार सृजन और कौशल विकास को प्रमुख प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य युवाओं के लिए अधिक रोजगार अवसर पैदा करना और स्किल ट्रेनिंग को मजबूत करना होगा।

2. बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर भी जोर रहने की उम्मीद है। खासतौर पर MSMEs और निर्यात आधारित उद्योगों के लिए समर्थन बढ़ाया जा सकता है।

3. कृषि क्षेत्र को लेकर भी सरकार की ओर से समन्वित सहायता की संभावना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा सके।

4. इसके अलावा, शोध एवं विकास (R&D) और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है, जिससे लंबी अवधि के आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिले।

5. बजट में विनियमन कम करने और कारोबार करने में आसानी (Ease of Doing Business) को और बेहतर बनाने के लिए भी अहम कदम उठाए जाने की उम्मीद है।

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टैक्स रेवेन्यू 9.6% बढ़ने का अनुमान

केयरएज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू 9.6 फीसदी की दर से बढ़ेगा। यह वृद्धि 10.1 फीसदी की अनुमानित नॉमिनल जीडीपी वृद्धि के लगभग अनुरूप है, लेकिन पहले के औसत से कम रहेगी। टैक्स ब्वॉयेंसी के 0.95 रहने का अनुमान है, जो जीएसटी दरों के सरलीकरण और डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन की धीमी रफ्तार से बने दबाव को दर्शाता है।

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में सुधार की उम्मीद

वित्त वर्ष 2027 में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में सीमित सुधार देखने को मिल सकता है। इसका कारण कॉरपोरेट मुनाफे में धीरे-धीरे हो रही रिकवरी और इनकम टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी माना जा रहा है।

हालांकि, अप्रत्यक्ष करों पर दबाव बने रहने की संभावना है। इसके बावजूद फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों पर बढ़ाई गई उत्पाद शुल्क दरों से उत्पाद शुल्क कलेक्शन (excise collections) को कुछ सहारा मिलने का अनुमान है।

RBI डिविडेंड से मिला सहारा

नॉन टैक्स रेवेन्यू के मोर्चे पर, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिले ज्यादा डिविडेंड ने वित्त वर्ष 2026 में सरकार को बड़ी राहत दी है। केयरएज का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में नॉन टैक्स रेवेन्यू बजट अनुमान से ज्यादा रह सकता है। हालांकि, वित्त वर्ष 2027 में आरबीआई से मिलने वाला डिविडेंड घटकर 2 से 2.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में 2.7 लाख करोड़ रुपये रहा था।

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कैपेक्स पर रहेगा खास फोकस

पूंजीगत व्यय (Capital expenditure) केंद्र सरकार की विकास रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 के पहले आठ महीनों में 28.2 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज करने के बाद, वित्त वर्ष 2027 में पूंजीगत व्यय के 10 फीसदी बढ़कर 12.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। व्यय की गुणवत्ता भी मजबूत बने रहने की उम्मीद है, जहां पूंजीगत व्यय और राजस्व व्यय का अनुपात वित्त वर्ष 2026 और 2027 दोनों में लगभग 0.3 रहने का अनुमान है।

हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में अब तक राजस्व व्यय (Revenue expenditure) की वृद्धि सुस्त रही है, जिसका एक कारण व्यय युक्तिकरण के कदम हैं। केयरएज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में राजस्व व्यय में करीब 1.7 लाख करोड़ रुपये की कटौती की जा सकती है, जिससे राजकोषीय घाटे को काबू में रखने में मदद मिलेगी।

फिस्कल डेफिसिट कम करने पर जोर

वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) राशि के लिहाज से बजट लक्ष्य से थोड़ा अधिक रहने का अनुमान है, लेकिन यह जीडीपी के 4.4 फीसदी के स्तर पर सीमित रह सकता है। वित्त वर्ष 2027 के लिए केयरएज को उम्मीद है कि राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.2 से 4.3 फीसदी के बीच बजट में तय किया जाएगा, जो राजकोषीय अनुशासन को जारी रखने का संकेत देता है।

वित्त वर्ष 2027 में सकल बाजार उधारी (Gross market borrowings) 16 से 17 लाख करोड़ रुपये के दायरे में रहने का अनुमान है। कर्ज भुगतान के दबाव को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक बॉन्ड स्विचिंग कर सकता है।

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विनिवेश एक कमजोर कड़ी

विनिवेश सरकार के लिए एक कमजोर पक्ष बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026 के पहले आठ महीनों में विनिवेश से सिर्फ 49 अरब रुपये की प्राप्ति हुई है, जो बजट लक्ष्य से काफी कम है। केयररएज का अनुमान है कि गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियों (non-debt capital receipts) में कमी रहेगी। IDBI Bank और LIC सहित बड़ी हिस्सेदारी बिक्री के सौदे अगले वित्त वर्ष के लिए टाले जाने की संभावना है।

केयरएज के सर्वे में उद्योग जगत के प्रतिभागियों ने आगामी बजट के लिए इनोवेशन और अनुसंधान एवं विकास (R&D), MSMEs और निर्यात उन्मुख क्षेत्रों को समर्थन, रोजगार सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को शीर्ष प्राथमिकताएं बताया है। सर्वे में शामिल लोगों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भू-राजनीतिक जोखिम, रोजगार सृजन और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रमुख चुनौतियों के रूप में भी चिन्हित किया है।

First Published - January 23, 2026 | 7:07 PM IST

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