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Budget 2026: मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस से लेकर MSME तक; उद्योग जगत इस साल के बजट से क्या चाहता है?

केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले फिक्की के सर्वे में उद्योग जगत द्वारा आर्थिक वृद्धि, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात को प्राथमिकता देने की बात कही गई है

Last Updated- January 23, 2026 | 3:52 PM IST
Union Budget 2026
FICCI Pre Budget Survey में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए कैपिटल बजट को 30 फीसदी तक ले जाने की मांग की गई है

भारत की कंपनियां अगले केंद्रीय बजट को लेकर काफी उत्साहित हैं। FICCI की ताजा प्री-बजट सर्वे में सामने आया है कि करीब 80 फीसदी उद्योगपति देश की आर्थिक तरक्की को लेकर भरोसा जता रहे हैं। सर्वे में शामिल आधे लोग यानी 50 फीसदी का मानना है कि अगले वित्त वर्ष यानी वित्त वर्ष 27 में GDP ग्रोथ 7 से 8 फीसदी के बीच रहेगी। वे कहते हैं कि दुनिया में भले ही कितनी भी उथल-पुथल मचे, लेकिन भारत की बुनियादी मजबूती बरकरार है।

राजकोषीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट) पर भी इंडस्ट्री का यकीन मजबूत है। लगभग 42 फीसदी लोगों को लगता है कि सरकार इस साल यानी FY26 में 4.4 फीसदी GDP के टारगेट को पूरा कर लेगी।

बजट में क्या-क्या टॉप पर चाहिए?

उद्योगपतियों ने बजट से तीन मुख्य चीजें मांगी हैं जिसमें ज्यादा से ज्यादा नौकरियां पैदा करना, इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार जोर और एक्सपोर्ट को मजबूत बनाने के लिए बेहतर मदद शामिल है। उनका मानना है कि खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस और छोटे-मध्यम उद्योगों (MSME) पर फोकस बरकरार रहने की उम्मीद है।

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मैन्युफैक्चरिंग को और बढ़ावा देने के लिए कैपिटल खर्च बढ़ाने की बात कही गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में एक बड़ा इंडस्ट्रियल क्लस्टर बनाने का सुझाव है, जहां ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM), इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) और कंपोनेंट सप्लायर्स सब एक जगह हों। इससे पूरा इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम और मजबूत होगा।

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाया जाए: इंडस्ट्री

डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के लिए कैपिटल बजट को 30 फीसदी तक ले जाने की मांग है। क्योंकि UAV, काउंटर-यूएवी, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और AI वाली नई तकनीकों के लिए पैसों की सख्त जरूरत है। ड्रोन PLI स्कीम के लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान और एक अलग 1000 करोड़ रुपये का ड्रोन रिसर्च एंड डेवलपमेंट फंड बनाने की सिफारिश की गई है।

एक्सपोर्ट के मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ रही हैं। ग्लोबल ट्रेड में टैरिफ की अनिश्चितता, CBAM और डिफॉरेस्टेशन जैसे नियमों से परेशानी हो रही है। इसलिए एक्सपोर्ट पॉलिसी को और बेहतर करने, कस्टम और ट्रेड प्रोसेस को आसान बनाने, लॉजिस्टिक्स-पोर्ट की देरी खत्म करने की जरूरत बताई गई है।

रोडटेप स्कीम में ज्यादा फंड देने, एसईजेड पॉलिसी में सुधार और कस्टम टैरिफ को तीन स्टैंडर्ड रेट में बदलने जैसे सुझाव हैं ताकि व्यापार ज्यादा सुचारू और भरोसेमंद हो।

डायरेक्ट टैक्स में भी तीन बड़े बदलाव मांगे गए हैं जिसमेंऑनलाइन टैक्स रिपोर्टिंग को और आसान बनाना, टैक्सपेयर को निश्चित नतीजे देने की व्यवस्था और विवाद-मुकदमों को जल्दी निपटाने की बेहतर सिस्टम शामिल है। रिपोर्ट में कॉर्पोरेट रिस्ट्रक्चरिंग और निवेशकों की सेवाओं को भी और सुविधाजनक बनाने की बात कही गई है।

First Published - January 23, 2026 | 3:52 PM IST

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