Market This Week: भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार (23 जनवरी) को गिरावट दर्ज की गई और सप्ताह के अंत में बाजार नुकसान में बंद हुए। लगातार विदेशी निवेशकों की निकासी और मिले-जुले तिमाही नतीजों ने ग्रीनलैंड से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव में नरमी से मिली राहत को पीछे छोड़ दिया।
नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 (Nifty-50) में 0.95 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 25,048.65 पर बंद हुआ। जबकि बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 0.94 प्रतिशत टूटकर 81,537.70 पर आ गया। निफ्टी-50 इंडेक्स में पूरे सप्ताह (19 जनवरी-23 जनवरी) के दौरान 2.5 प्रतिशत की गिरावट आई। यह इंडेक्स में पिछले चार महीनों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट रही। वहीं, 30 शेयरों वाला सेंसेक्स साप्ताहिक आधार पर 2.4 प्रतिशत टूट गया।
अदाणी समूह की कंपनियों के शेयर शुक्रवार को 3.4 प्रतिशत से 14.5 प्रतिशत तक गिर गए और बाजार की गिरावट का नेतृत्व किया। समूह के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। यह गिरावट उस खबर के बाद आई, जिसमें कहा गया कि अमेरिकी बाजार नियामक समूह के वरिष्ठ नेतृत्व से जुड़े कानूनी कदम आगे बढ़ाने के लिए अदालत से अनुमति मांग रहा है।
भारी भरकम शेयरों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज सप्ताह के दौरान 4.9 प्रतिशत गिर गया। कंपनी का तीसरी तिमाही का मुनाफा अनुमान से कम रहा। इसकी वजह खुदरा कारोबार में धीमी वृद्धि रही।
निजी क्षेत्र के बैंक आईसीआईसीआई बैंक के शेयर सप्ताह में 4.8 प्रतिशत टूट गए। पर्यवेक्षण समीक्षा के बाद अधिक प्रावधानों के कारण बैंक का मुनाफा अनुमान से कम रहा।
दवा कंपनी सिप्ला के शेयर शुक्रवार को 4 प्रतिशत गिरे और पूरे सप्ताह में इसकी गिरावट 5.9 प्रतिशत तक पहुंच गई। कंपनी का तिमाही मुनाफा तेज गिरावट के कारण दबाव में रहा।
एयरलाइन कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयर दिन में 4.2 प्रतिशत टूट गए, क्योंकि बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने से तीसरी तिमाही का मुनाफा तेज गिरावट के साथ आया।
सप्ताह के दौरान सभी 16 प्रमुख सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स क्रमशः 5.8 प्रतिशत और 4.6 प्रतिशत टूटे। भारत-अमेरिका ट्रीड डील को लेकर अनिश्चितता भी बाजार धारणा और विदेशी निवेशकों के प्रवाह पर दबाव बनाए हुए है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता के लंबित रहने से बाजार स्थिरता नहीं पकड़ पा रहे हैं। इससे घबराहट में विदेशी निवेशकों की निकासी बढ़ी है और जोखिम लेने की क्षमता कमजोर बनी हुई है।
जनवरी में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 3.5 अरब डॉलर की निकासी की है। इससे यह अगस्त के बाद सबसे बड़ी मासिक निकासी की ओर बढ़ रहा है।
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एक्सपर्ट्स के अनुसार, मिले-जुले तिमाही नतीजों ने भी बाजार पर दबाव डाला है। निवेशक अब 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आर्थिक विकास को समर्थन देने वाले उपायों की उम्मीद है।
निवेशकों की वेल्थ में इस हफ्ते तगड़ा नुकसान हुआ है। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप पिछले शुक्रवार (19 जनवरी) को 46,781,995 करोड़ रुपये था। इस शुक्रवार को यह घटकर 45,156,045 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह, बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप इस हफ्ते 1,625,950 करोड़ रुपये घट गया।