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ट्रंप की शांति पहल से भारत की दूरी, कूटनीतिक संकेत क्या हैं?

गाजा से जुड़ी पहल पर भारत ने अभी कोई फैसला नहीं लिया

Last Updated- January 23, 2026 | 8:53 AM IST
Donald Trump

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने और संभवत: वैश्विक संघर्षों का समाधान करने की दिशा में काम करने के लिए प्रस्तावित ‘शांति बोर्ड’ फाउंडिंग चार्टर का गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में औपचारिक रूप से अनावरण किया, लेकिन भारत इस मौके पर अनुपस्थित रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन कई वैश्विक नेताओं में से थे, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत घोषित बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। भारत के अलावा फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, जर्मनी और कई अन्य प्रमुख देश भी न्योते के बावजूद ‘शांति बोर्ड’ के अनावरण समारोह से नदारद रहे।

ट्रंप ने दावोस में डब्ल्यूईएफ बैठक से इतर इस समारोह की मेजबानी की। उन्होंने यहां समारोह को संबोधित करते हुए इस बोर्ड को दुनिया के लिए बेहद अनोखी पहल’ बताया। उन्होंने बोर्ड के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के लिए आयोजित समारोह में कहा, ‘यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर न केवल पश्चिम एशिया, बल्कि अन्य जगहों पर भी युद्धों को सुलझाने में मदद कर सकता है।

पूरे घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को ट्रंप के निमंत्रण के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारत ने अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि भारत इस पहल के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है, क्योंकि इसमें कई संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। भारत फिलिस्तीन मुद्दे के लिए ‘दो-राष्ट्र समाधान’ पर जोर दे रहा है, जिसमें इजरायल और फिलिस्तीन मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ अगल-बगल रह सकें।

ट्रंप के ‘शांति बोर्ड’ को अमेरिका द्वारा गाजा और उसके बाहर शांति और स्थिरता लाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप में पेश किया जा रहा है। इस पहल से अटकलें लगाई जा रही हैं कि ‘शांति बोर्ड’ संयुक्त राष्ट्र के प्रतिद्वंद्वी निकाय के तौर पर उभर सकता है। मूल रूप से इस ‘शांति बोर्ड’ को गाजा के पुनर्निर्माण के लिए शासन की देखरेख करने और धन के समन्वय का कार्य सौंपा जाना था, जो इजरायल की सेना की गत दो वर्ष तक चली कार्रवाई के दौरान तबाह हो गया है।

बोर्ड के ‘घोषणापत्र’ में कहा गया है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो संघर्ष से प्रभावित या खतरे में पड़े क्षेत्रों में स्थिरता को बढ़ावा देने, विश्वसनीय और वैध शासन को बहाल करने और स्थायी शांति सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।

First Published - January 23, 2026 | 8:53 AM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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