प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर शुक्रवार शाम तक करीब 3.2 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। बसंत पंचमी के स्नान के साथ ही संगम तट पर लगभग एक महीने से डेरा डाले कल्पवासियों की वापसी शुरू हो गई है। मेला प्रशासन ने बसंत पंचमी के अवसर पर करीब 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम स्नान का अनुमान लगाया है।
माघ मेले में बसंत पंचमी का स्नान करने के लिए शुक्रवार तड़के चार बजे से ही संगम नोज पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने अपने शिष्यों के साथ संगम में स्नान किया।
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मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान प्रशासन से हुई तकरार के बाद से अनशन पर बैठे ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत शुक्रवार सुबह बिगड़ गई। उन्हें माघ मेला क्षेत्र में बने उनके आश्रम के पास खड़ी वैनिटी वैन में ले जाया गया। बसंत पंचमी के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। दोपहर बाद वे दर्शन देने के लिए सामने आए और कहा कि उनका मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी का स्नान पूर्ण नहीं हो सका है।
इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने सतुआ बाबा के साथ संगम में स्नान किया। उन्होंने कहा कि माघ मेला स्नान, ध्यान, तप और संतों की साधना का पर्व है, इसमें किसी तरह का विवाद हमारे बड़ों ने नहीं सिखाया। उन्होंने कहा कि जो विवाद हो रहा है, उससे सनातन का निरादर हो रहा है और सभी को संयम से काम लेते हुए इस विवाद को समाप्त करना चाहिए।
बसंत पंचमी के स्नान के लिए पहुंचे मौनी बाबा ने भी कहा कि प्रशासन, सरकार और शंकराचार्य को मिलकर इस मामले का समाधान निकालना चाहिए। शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने पहुंचे। शिष्यों ने बताया कि उनके आश्रम में माघ मेले के दौरान सवा लाख मिट्टी के शिवलिंग स्थापित किए जाने थे, लेकिन विवाद गहराने के चलते यह कार्य नहीं हो सका।
वहीं, बसंत पंचमी के स्नान के साथ ही माघ मेला उजड़ना शुरू हो गया है। संगम तट पर लगभग एक माह तक कल्पवास करने वाले श्रद्धालु अब लौटने लगे हैं, जबकि नागा संन्यासी मौनी अमावस्या के स्नान के बाद से ही वापस लौटने लगते हैं। हालांकि माघ मेले का औपचारिक समापन अगले महीने महाशिवरात्रि के स्नान के साथ होगा।