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उत्तर प्रदेश व पश्चिम बंगाल की मंडियों में आलू की कीमतें तेजी से गिरीं, किसानों को नहीं मिल रही लागत

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किसानों द्वारा उपजाए गए आलू की मंडियों में भारी आवक और बंपर पैदावार के कारण कीमतों में गिरावट आई और अधिकांश किसानों की लागत भी नहीं निकल पाई

Last Updated- January 09, 2026 | 10:58 PM IST
potato
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सीजन की शुरुआत में ही आलू का दम निकल रहा है। विभिन्न राज्यों की मंडियों में आलू के दाम धड़ाम से गिर गए हैं। भाव इतने नीचे आ चुके हैं कि किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। कुछ स्थानों पर किसानों को अपनी उपज सड़कों पर फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

जानकारों का कहना है कि आलू की कीमतों में तेज गिरावट की मुख्य वजह यह है कि पिछले साल का आलू स्टॉक अभी भी बडी मात्रा में कोल्ड स्टोरेज में बचा हुआ है। दूसरा कारण यह है कि अनुकूल मौसम से इस साल भी आलू की बंपर पैदावार की उम्मीद है। कारोबारियों के मुताबिक इस महीने आलू के दाम में नरमी बनी रह सकती है। हालांकि अगले महीने से भाव में सुधार की संभावना है।

आलू के सबसे बडे उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश की प्रमुख मंडी आगरा में महीने भर में इसके थोक भाव 900-1,250 रुपये से घटकर 500-650 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। आलू के दूसरे बडे उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल की कोलकाता मंडी में दाम 1,500-1,550 रुपये से घटकर 1,100-1,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। इस दौरान मध्य प्रदेश की इंदौर मंडी में भाव 500-1,400 रुपये से घटकर 300-900 रुपये और दिल्ली की मंडियों में 800-1,400 रुपये से घटकर 300-900 रुपये पर आ गए हैं।

मंडियों में भाव घटने से खुदरा बाजार में भी भाव कम हुए हैं। पिछले महीने 20 से 25 रुपये किलो बिकने वाला आलू अब 13 से 20 रुपये किलो बिक रहा है। आगरा मंडी के आलू कारोबारी दीपक कुमार ने कहा कि इस समय मंडियों में आलू की खूब आवक हो रही है। जिससे आलू के भाव महीने भर में तेजी से गिरे हैं। इसकी वजह पिछले साल का भारी मात्रा में बचा स्टॉक है। साथ ही नए आलू की आवक भी हो रही है जिससे आलू सस्ता हो रहा है।

दिल्ली की आजादपुर मंडी के आलू कारोबारी विनेश कुमार ने कहा कि इस समय आलू की खपत 90 से 100 गाड़ियों की है जबकि मंडी में आवक 130 से 140 गाड़ी की हो रही है। जाहिर है मांग से ज्यादा आवक होने के कारण आलू के दाम गिर रहे हैं। पश्चिम बंगाल कोल्ड स्टोर संघ के सदस्य गोविंद कजारिया ने बताया कि 30 नवंबर तक कोल्ड स्टोर खाली हो जाने चाहिए थे, जो अभी भी खाली नहीं हुए हैं। पश्चिम बंगाल के कोल्ड स्टोर में 50 लाख बोरी आलू बचा हुआ है।

मध्य प्रदेश कोल्ड स्टोर संघ के अध्यक्ष हसमुख जैन ने कहा कि नवंबर में खाली होने वाले स्टोर के 15 जनवरी तक खाली होने की संभावना है। दिसंबर में खराब होने के डर से बाजार में पुराना आलू भी तेजी से आया। साथ ही नए की भी आवक शुरू हो गई। ऐसे में भारी आवक के दबाव में आलू के दाम काफी घट गए हैं। मंडियों में आलू 5-6 रुपये किलो बिक रहा है। अच्छी गुणवत्ता वाला आलू जो चिप्स कंपनियां लेती हैं, वह भी 8 रुपये किलो तक गिर गया है।

राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के पूर्व निदेशक आर पी गुप्ता ने बताया कि इस साल मौसम आलू की फसल के अनुकूल रहा है। अगर आगे भी मौसम ऐसा ही रहा तो आलू का उत्पादन 5 फीसदी बढ़ सकता है। उत्पादन बढ़ने की उम्मीद से भी आलू के दाम घटे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में 581 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ था। इस साल यह 600 लाख टन पार करने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश के आलू किसान बटुक नारायण मिश्रा ने बताया कि आलू के दाम इतने गिर गए हैं कि अब लागत भी नहीं निकल पा रही है। किसानों को ज्यादातर आलू के 5-6 रुपये किलो दाम मिल रहे हैं, जबकि लागत ही 8 रुपये किलो से अधिक है। गेहूं के लिए खेत खाली करने के चक्कर में आलू निकालना मजबूरी थी।

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First Published - January 9, 2026 | 10:49 PM IST

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