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बड़ी कंपनियों की कमाई में दम नहीं, निफ्टी 50 का मुनाफे में हिस्सा 5 साल के सबसे निचले स्तर पर

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बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी 50 की कमाई पर सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग, एफएमसीजी और आईटी सेवाओं जैसे बड़े सेक्टरों की सुस्ती की वजह से है

Last Updated- June 03, 2026 | 3:55 PM IST
Nifty 50

देश की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा चर्चित कंपनियां इन दिनों कमाई बढ़ाने के लिए जूझ रही हैं। यही वजह है कि भले ही भारत की कुल कॉरपोरेट कमाई में सुधार दिख रहा हो, लेकिन निफ्टी 50 में शामिल दिग्गज कंपनियों का योगदान लगातार घटता जा रहा है। मार्च 2026 तिमाही में सभी लिस्टेड कंपनियों के कुल मुनाफे में निफ्टी 50 कंपनियों की हिस्सेदारी घटकर 47.1 फीसदी रह गई। एक साल पहले यह आंकड़ा 51.8 फीसदी था। दिलचस्प बात यह है कि दिसंबर 2022 तिमाही में निफ्टी 50 कंपनियां देश की कुल कॉरपोरेट कमाई का 58.3 फीसदी हिस्सा देती थीं। यानी पिछले कुछ वर्षों में बड़ी कंपनियों का दबदबा साफ तौर पर कमजोर हुआ है।

कमाई बढ़ी, लेकिन रफ्तार बेहद धीमी

मार्च 2026 तिमाही में निफ्टी 50 कंपनियों का समायोजित शुद्ध लाभ सिर्फ 4.5 फीसदी बढ़ा। यह लगातार आठवीं तिमाही है जब इन कंपनियों की कमाई की वृद्धि 10 फीसदी से नीचे रही है। चिंता की बात यह भी है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पिछले साल की समान तिमाही में भी कमाई की रफ्तार सिर्फ 2.9 फीसदी थी।

इस दौरान सरकार ने आयकर दरों में राहत दी और कुछ वस्तुओं पर जीएसटी भी कम किया, जिससे उम्मीद थी कि मांग बढ़ेगी और कंपनियों की कमाई में तेजी आएगी। लेकिन बड़ी कंपनियों के नतीजों में इसका असर अभी तक साफ नजर नहीं आया है।

Also Read: क्या Small Cap Funds पर फिर दांव लगाने का समय आ गया? वैल्यूएशन, कमाई और फंडामेंटल्स दे रहे संकेत

बाकी कंपनियां आगे निकल रही हैं

जहां निफ्टी 50 कंपनियों की कमाई सुस्त रही, वहीं दूसरी लिस्टेड कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया। बिजनेस स्टैंडर्ड के विश्लेषण में शामिल 3,081 कंपनियों का समायोजित शुद्ध लाभ मार्च तिमाही में 15.1 फीसदी बढ़ा। यानी बड़ी कंपनियों के मुकाबले मध्यम और छोटी कंपनियां कहीं बेहतर गति से मुनाफा बढ़ा रही हैं।

मार्च 2026 तिमाही में सभी लिस्टेड कंपनियों का कुल समायोजित शुद्ध लाभ बढ़कर 4.74 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 कंपनियों का कुल मुनाफा 2.23 लाख करोड़ रुपये रहा।

आखिर दिक्कत कहां है?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी 50 की कमाई पर सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग, एफएमसीजी और आईटी सेवाओं जैसे बड़े सेक्टरों की सुस्ती की वजह से है। सिस्टमेटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटी में रिसर्च और इक्विटी स्ट्रैटेजी के सह-प्रमुख धनंजय सिन्हा कहते हैं कि बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, उपभोक्ता वस्तुएं और आईटी सेवाएं मिलकर निफ्टी 50 में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी रखती हैं। लेकिन फिलहाल इन तीनों क्षेत्रों में कमाई की वृद्धि काफी कमजोर है, जिसका असर पूरे सूचकांक की कमाई पर पड़ रहा है।

उनके मुताबिक, जब तक इन बड़े सेक्टरों की कमाई में सुधार नहीं होगा, तब तक निफ्टी 50 की आय में भी तेज बढ़ोतरी की उम्मीद करना मुश्किल होगा।

बिक्री बढ़ रही है, लेकिन मुनाफा नहीं

दिलचस्प बात यह है कि निफ्टी 50 कंपनियों की बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है। मार्च 2026 तिमाही में इनकी कुल आय 11.4 फीसदी बढ़ी, जो पिछले 12 तिमाहियों का सबसे ऊंचा स्तर है। यानी कंपनियां ज्यादा सामान और सेवाएं बेच रही हैं, लेकिन उसके मुकाबले मुनाफा नहीं बढ़ पा रहा। इसका मुख्य कारण बढ़ती लागत है। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों का खर्च बढ़ गया है, जिससे उनकी कमाई पर दबाव पड़ा है।

बढ़ती लागत ने घटाया मार्जिन

मार्च तिमाही में निफ्टी 50 कंपनियों का एबिटडा मार्जिन घटकर 29.3 फीसदी रह गया, जो एक साल पहले 31.5 फीसदी था। आसान भाषा में कहें तो कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा लागत में निकल गया और उनके पास मुनाफे के लिए कम पैसा बचा। इसके मुकाबले बाकी लिस्टेड कंपनियों के मार्जिन में ज्यादा गिरावट नहीं आई। इससे भी साफ होता है कि बड़ी कंपनियां फिलहाल लागत के दबाव से ज्यादा प्रभावित हैं।

कुछ कंपनियों ने संभाला मोर्चा

कुल कॉरपोरेट कमाई में हुई बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा सिर्फ कुछ कंपनियों से आया। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), ओएनजीसी, एनटीपीसी और इंडसइंड बैंक ने मिलकर कुल मुनाफे की वृद्धि में अहम योगदान दिया। इन पांच कंपनियों ने कुल अतिरिक्त कमाई का लगभग एक-तिहाई हिस्सा दिया। हालांकि इनमें से सिर्फ ओएनजीसी और एनटीपीसी ही निफ्टी 50 का हिस्सा हैं।

क्यों घट रहा है निफ्टी 50 का असर?

विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां, तेल विपणन कंपनियां और धातु क्षेत्र की कंपनियों ने मुनाफे में अच्छी बढ़ोतरी दिखाई है। लेकिन इन क्षेत्रों की निफ्टी 50 में हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। यही वजह है कि देश की कुल कॉरपोरेट कमाई बढ़ रही है, लेकिन निफ्टी 50 की तस्वीर उतनी मजबूत नहीं दिख रही। फिलहाल आंकड़े यही संकेत दे रहे हैं कि भारतीय कॉरपोरेट जगत में कमाई की असली रफ्तार अब बड़ी कंपनियों के बजाय दूसरी कंपनियों से आ रही है।

संकेतक मार्च 2021 मार्च 2026 बदलाव
निफ्टी 50 कंपनियों का शुद्ध लाभ 1.22 लाख करोड़ रुपये 2.23 लाख करोड़ रुपये करीब 83% बढ़ोतरी
कुल कॉरपोरेट कमाई में निफ्टी 50 की हिस्सेदारी 53.6% 47.1% 6.5 प्रतिशत अंक की गिरावट
निफ्टी 50 कंपनियों की आय (रेवेन्यू) वृद्धि 22.4% (मार्च 2022 के आसपास उच्च स्तर) 11.4% वृद्धि दर में कमी
बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, बीमा, तेल एवं गैस को छोड़कर कंपनियों की आय वृद्धि 19.3% (मार्च 2022 के आसपास उच्च स्तर) 15.3% अपेक्षाकृत बेहतर वृद्धि

नोट: निफ्टी 50 के आंकड़ों में टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स को शामिल किया गया है, जिसे सितंबर 2025 में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स से अलग किया गया था। बीएफएसआई में बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी), बीमा कंपनियां और शेयर ब्रोकिंग कंपनियां शामिल हैं। पूरे सैंपल में 3,081 लिस्टेड कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। इसमें उनकी लिस्टेड सहायक कंपनियों (सब्सिडियरी) को शामिल नहीं किया गया है।

स्रोत: कैपिटलाइन; बिजनेस स्टैंडर्ड रिसर्च ब्यूरो द्वारा संकलित।

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First Published - June 3, 2026 | 3:55 PM IST

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