हर साल की तरह इस बार भी केंद्रीय बजट 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को संसद में बजट पेश करने वाली हैं, जो कि रविवार को होगा। ये हाल के सालों में थोड़ा अनोखा है। लेकिन बजट से ठीक पहले एक और अहम दस्तावेज आता है, जिसे ‘आर्थिक सर्वेक्षण’ (Economic Survey) कहते हैं। 2026 के लिए ये सर्वे 29 जनवरी को पेश होगा। अगर बजट आने वाले साल का ‘ब्लूप्रिंट’ है, तो इकोनॉमिक सर्वे पिछले साल का ‘रिपोर्ट कार्ड’ है।
इकोनॉमिक सर्वे एक सालाना रिपोर्ट है जो भारत की अर्थव्यवस्था की पूरी जांच-पड़ताल करता है। इसमें जीडीपी ग्रोथ, महंगाई, रोजगार, व्यापार, कृषि, इंडस्ट्री, सर्विस सेक्टर जैसी चीजों पर गहराई से बात होती है। साथ ही, ये पिछले साल के आंकड़ों का विश्लेषण करता है और आगे के ट्रेंड्स बताता है।
मिसाल के तौर पर, ये बताता है कि अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से बढ़ रही है, कहां निवेश बढ़ाना चाहिए और किन सेक्टरों में चुनौतियां हैं। ये रिपोर्ट दो हिस्सों में आती है जिसमें एक में आंकड़े और चार्ट्स होते हैं, दूसरा हिस्सा नीतियों और सुझावों पर फोकस करता है। ये सिर्फ सरकार के लिए नहीं, बल्कि इनवेस्टर्स, बिजनेसमैन और आम लोगों के लिए भी उपयोगी है, क्योंकि ये अर्थव्यवस्था की सच्ची तस्वीर दिखाता है। 2025-26 के सर्वे में क्लाइमेट चेंज, एम्प्लॉयमेंट और AI जैसे नए टॉपिक्स पर भी बात हो सकती है, जैसा कि पहले के सर्वे में देखा गया है।
इसे वित्त मंत्रालय के ‘इकोनॉमिक डिवीजन’ द्वारा तैयार किया जाता है। इसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) की होती है। फिलहाल यह जिम्मेदारी डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन संभाल रहे हैं।
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भारत में इकोनॉमिक सर्वे पेश करने की परंपरा 1950-51 से चली आ रही है। साल 1964 तक इसे बजट के साथ ही पेश किया जाता था, लेकिन बाद में इसे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाने लगा ताकि लोग बजट की घोषणाओं को समझने से पहले देश की असली आर्थिक स्थिति को जान सकें।
इसके महत्व को हम इन पॉइंट्स से समझ सकते हैं:
केंद्रीय बजट 2026 से पहले आने वाले इस सर्वे में कुछ खास आंकड़ों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। हालिया डेटा के मुताबिक, भारत अब जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। ऐसे में यह सर्वे बताएगा कि हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं।
सर्वे में महंगाई (Inflation) और बेरोजगारी (Unemployment) के आंकड़ों को भी गंभीरता से देखा जाएगा। नवंबर 2025 में खुदरा महंगाई दर में काफी नरमी देखी गई थी, जो गिरकर 0.71% तक आ गई थी, जबकि जनवरी 2025 में यह 4.26% थी। साथ ही, बेरोजगारी दर में भी गिरावट दर्ज की गई है, जो नवंबर 2025 में 4.7% रही। सर्वे इन सकारात्मक संकेतों के साथ-साथ शहरी और ग्रामीण इलाकों में खपत (Consumption) के अंतर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी रोशनी डालेगा, जिससे यह साफ होगा कि आम आदमी की जेब और खर्च करने की ताकत में कितना सुधार हुआ है।