पिछले 17 सालों में हुए विधान सभा उप चुनावों में सत्तारूढ़ दल हमेशा विपक्ष पर मामूली बढ़त के साथ भारी पड़े हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2009 से अगस्त 2026 के बीच कुल 709 उप चुनाव हुए हैं। इनमें से 53 फीसदी पर सत्तारूढ़ दलों ने जीत हासिल की है, जबकि विपक्ष 47 फीसदी सीटों पर विजयी रहा।
बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात में हाल ही में हुए उपचुनावों के नतीजे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ी टक्कर को दर्शाते हैं। इन चुनावों में नई पार्टी जन सुराज और कांग्रेस ने तीन में से दो सीटें जीती हैं। भाजपा को केवल गुजरात में एक सीट से संतोष करना पड़ा है। खास बात यह है कि 17 वर्षों के दौरान दोनों पक्षों का चुनावी प्रदर्शन लगभग समान रहा।
वर्ष 2009 से 2013 के बीच जहां विपक्षी दलों ने 62 जीत दर्ज की थी, वहीं 2019 से 2023 के दौरान यह संख्या बढ़कर 125 तक पहुंच गई, लेकिन 2024 से अगस्त 2026 के बीच प्रदर्शन में गिरावट आई और विजयी सीटों की संख्या घटकर 47 रह गई। ठीक इसी तरह सत्तारूढ़ दलों का प्रदर्शन भी रहा। वर्ष 2009 से 2013 में सत्ता पक्ष के दलों ने उपचनावों में 66 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जो विपक्ष की तरह ही 2019 से 2023 के बीच बढ़कर 125 तक पहुंच गई। ताजा आंकड़ों में उनका हाल भी विपक्ष जैसा ही रहा और 2024 से अगस्त 2026 के बीच जीती सीटों की संख्या 65 पर सिमट गई।
पार्टी स्तर पर सत्तारूढ़ दलों में सबसे ज्यादा 30 फीसदी सीटें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीती हैं। इसके बाद कांग्रेस 27 फीसदी और तृणमूल कांग्रेस 6 फीसदी का नंबर आता है।
विपक्षी दलों की जीत में कांग्रेस 41 फीसदी के साथ सबसे आगे रही, उसके बाद जहां भाजपा विपक्ष में है तो उसने भी 17 फीसदी और समाजवादी पार्टी (सपा) ने 8 फीसदी सीटों पर जीत दर्ज की। आंकड़ों से पता चलता है कि जहां विपक्षी दलों ने विधान सभा उपचुनावों में लगातार अपनी उपस्थिति का विस्तार किया है, वहीं सत्तारूढ़ दल एक मामूली बढ़त बनाए हुए है।