इंडियन बैंक को वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 3146.88 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ हुआ है, जो पिछले साल की इसी अवधि से 8 प्रतिशत अधिक है। चेन्नई स्थित बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी विनोद कुमार ने शाइन जेकब के साथ एक विशेष साक्षात्कार में तीसरी तिमाही के नतीजों और भविष्य की वृद्धि के बारे में बात की। प्रमुख अंश…
इस तिमाही के दौरान वृद्धि की प्रमुख वजहें क्या थीं?
मेरे कारोबार की कुल वृद्धि 13.24 प्रतिशत है। इसमें से जमा में 12.62 प्रतिशत और एडवांस में 14.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अच्छी बात ययह है कि कासा वृद्धि भी 9.86 प्रतिशत है, कासा क्रमिक आधार पर 38.87 प्रतिशत से बढ़कर 39.08 प्रतिशत हो गया है। हम कासा बेहतर रखने में सफल हुए हैं। थोक में हम दिसंबर के स्तर को बरकरार रखा है। हमने थोक जमा में कुछ जोड़े बिना भी जमा में वृद्धि दर्ज की है। ऐसे में लागत में कुछ बचत हुई है।
हमने कर्ज भी अधिक दिया। ब्याज दरों को लेकर हमारी रणनीति बहुत आक्रामक नहीं थी और न यह बहुत प्रतिस्पर्धी थी, जब यह बहुत कम होती है। इसकी वजह से दर में 25 आधार अंक की कटौती के बावजूद यील्ड सिर्फ 9 आधार अंक घटी है। इससे भी मदद मिली। यही 3-4 वजहें रहीं, जिससे बेहतरीन वृद्धि हुई और शुद्ध लाभ बढ़ा है। अगर आप ऋण वृद्धि के मुख्य चालकों की बात करें तो राम (रिटेल, एग्री और एमएसएमई) ने मुख्य भूमिका निभाई। राम सेक्टर की वृद्धि करीब 16.65 प्रतिशत रही है। इसमें से खुदरा 18 प्रतिशत, एमएसएमई 16 प्रतिशत और कृषि 15 प्रतिशत बढ़ा है।
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राम में, ऑटो और आभूषण खंडों में तिमाही के दौरान क्रमशः 44 प्रतिशत और 89 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई। सोने की बढ़ी कीमत को देखते हुए आपकी क्या रणनीति है?
वाहन ऋण खंड भी पहले भी 40 प्रतिशत के आसपास बढ़ रहा था। बेशक जीएसटी 2.0 के फैसले का प्रभाव है। मुझे उम्मीद है कि अगली तिमाही के दौरान भी 40 प्रतिशत की वृद्धि जारी रहेगी। आभूषण ऋण में भी बेहतर वृद्धि हो रही है। हालांकि हमारी वृद्धि हुई है, लेकिन हमने कुछ इंटर बैंक पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट भी बेचे हैं। अगर कोई बेहतर मौका मिलता है, हम इससे भी मुनाफा कमाएंगे। हमें अच्छी मांग नजर आ रही है, लेकिन हमने कई कदम भी उठाए हैं, क्योंकि लागत अभी सर्वोच्च स्तर पर है। यह भी सावधानी बरती है कि अगर सोने की कीमतें नीचे आएं, तब भी बैंक पर असर न पड़े।
संभावित ऋण हानि (ईसीएल) ढांचे में बदलाव का क्या असर होगा?
अभी अगर हम कोई आंकड़ा दे भी दूं तो किसी काम का नहीं है, क्योंकि अभी मसौदा दिशानिर्देश आए हैं। हमने भारतीय रिजर्व बैंक से कुछ बदलाव का अनुरोध किया है। हमें अभी अंतिम दिशानिर्देश का इंतजार करना चाहिए। ईसीएल को ध्यान में रखकर हमने पहले पी स्टैंडर्ड असेट के लिए प्रावधान बनाने शुरू कर दिए हैं। मेरा लक्ष्य है कि पूरे ईसीएल का असर पहले साल में ही खत्म कर लेने का है। कुछ पूंजी जुटाने का हमारे पास विकल्प है। क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट का विकल्प न चुनने पर भी पहले साल में ही इसके असर को खत्म कर सकते हैं।
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दीर्घकालिक वृद्धि का क्या खाका है?
हमने दिसंबर 2024 में 5 वर्षों में व्यवसाय के आंकड़े को दोगुना करने का लक्ष्य रखा, जब यह 12.62 लाख करोड़ रुपये था। दिसंबर 2030 तक इसे 25 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य बना रहे हैं। अभी यह 14.3 लाख करोड़ रुपये है। पिछले एक साल में हमने 1.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक जोड़े हैं, और हम सही रास्ते पर हैं। हम चालू खाते खोलने, क्रॉस-सेल मॉड्यूल, व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन, स्वचालित शिकायत निवारण व संदिग्ध लेनदेन रिपोर्टिंग में एआई के उपयोग को धीरे-धीरे बढ़ा रहे हैं।
नए श्रम कानूनों के असर को किस तरह देख रहे हैं?
मेरे बैंक सहित सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर शायद ही कोई प्रभाव पड़ेगा। हमारे बैंक में 15 संविदा कर्मचारी हैं, और ग्रेच्युटी व सभी पर इसका प्रभाव 55.86 लाख रुपये है।
ऐसी खबरें थीं कि कई बैंक संकट से जूझ रहे दूरसंचार ऑपरेटर वोडाफोन आइडिया के लिए 25,000 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं। क्या उन्होंने औपचारिक रूप से संपर्क किया?
वोडाफोन में हमारा कोई एक्सपोजर नहीं है व अब तक हमसे संपर्क नहीं किया गया है।
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अमेरिकी शुल्क का कोई प्रभाव?
यह बहुत कम है। निर्यात क्षेत्र को हमने कुल 1,500 करोड़ रुपये से भी कम दिए है और उसमें से अमेरिका को निर्यात की हिस्सेदारी महज 4 से 5 प्रतिशत है।