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आर्टिफिशल इंटेलिजेंस निवेश में भारत आठवें स्थान पर, अमेरिका और सिंगापुर सबसे आगे: रिपोर्ट

इस निवेश को 2024 में इन देशों के सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में बदलकर यह गणना की गई। अमेरिका और सिंगापुर शीर्ष दो स्थानों पर रहे

Last Updated- January 23, 2026 | 9:58 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत को वर्ष 2010 से 2014 के बीच आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में किए गए संचयी निवेश के आधार पर की गई गणना में 11 देशों में आठवां स्थान दिया गया है। इस निवेश को 2024 में इन देशों के सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में बदलकर यह गणना की गई। अमेरिका और सिंगापुर शीर्ष दो स्थानों पर रहे।

दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक में जारी और बैन ऐंड कंपनी के साथ सहयोग के जरिये तैयार ‘रीथिंकिंग एआई सॉवरिनिटी’ नामक श्वेत पत्र कहता है कि 2010 से अब तक भारत का संचयी निवेश 2024 के जीडीपी के 1.2 से 1.8 फीसदी के बीच है जबकि अमेरिका 3.4 से 5.1 फीसदी के साथ पहले स्थान पर, सिंगापुर 3.1 से 4.6 फीसदी के साथ दूसरे, दक्षिण कोरिया 2.2 से 3.3 फीसदी के साथ तीसरे और चीन 1.7 से 2.6 फीसदी के साथ चौथे स्थान पर रहा।

भारत से कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों और देशों में यूरोप (यूके को छोड़कर) 1.1 से 1.6 फीसदी और ब्राजील 0.7 से 1.1 फीसदी रहा। जो देश भारत से ऊपर रहे उनमें संयुक्त अरब अमीरात, जापान, कनाडा और यूके शामिल हैं। अन्य देश सामूहिक रूप से लगभग भारत के बराबर थे लेकिन अधिकांश निवेश हार्डवेयर में हुआ, जिसे केवल दो कंपनियों टीएसएमसी और यूएमसी ने आगे बढ़ाया।

श्वेत पत्र स्पष्ट करता है कि एआई में बहुत अधिक धन की आवश्यकता है और इसमें तगड़ा निवेश किया जा रहा है। यह तब है जब निकट भविष्य में निवेश पर पर्याप्त प्रतिफल का कोई रोडमैप मौजूद नहीं है। चीन और अमेरिका इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रहे हैं। 2010 से अब तक एआई के क्षेत्र में हुए निवेश में उनकी हिस्सेदारी 65 फीसदी है। यह राशि 2,150 अरब डॉलर से 2,250 अरब डॉलर के बीच हो सकती है। रिपोर्ट कहती है कि 2030 तक हर वर्ष अनुमानित अतिरिक्त निवेश लगभग 1.5 लाख करोड़ डॉलर के स्तर पर होगा।

सबसे अधिक निवेश डेटा सेंटर के रूप में अधोसंरचना विकास में जा रहा है। 2010 से अब तक इसमें 600 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हो चुका है। 

First Published - January 23, 2026 | 9:58 PM IST

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