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रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसला, कच्चे तेल की उछाल और विदेशी निकासी से दबाव बढ़ा

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ब्रेंट क्रूड करीब 3 फीसदी चढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव पड़ा

Last Updated- April 29, 2026 | 10:42 PM IST
Rupee

बुधवार को रुपया 0.32 फीसदी गिरकर 94.85 प्रति डॉलर के नए निचले स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और विदेशी पूंजी के लगातार बाहर जाने की वजह से ऐसा हुआ। भारतीय मुद्रा अप्रैल में सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए उठाए गए नियामकीय कदमों के बाद मज़बूत हुई थी, लेकिन उसने अपनी सारी बढ़त गंवा दी। ब्रेंट क्रूड करीब 3 फीसदी चढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव पड़ा। बुधवार को फिलिपीस पेसो और इंडोनेशियाई रुपिया भी रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गए।

कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं क्योंकि ईरान संघर्ष को खत्म करने के रुके हुए प्रयासों के कारण होर्मुज स्ट्रेट प्रभावी रूप से बंद रहा, जिससे पश्चिम एशिया से आपूर्ति बाधित हुई। यूएई द्वारा ओपेक और ओपेक प्लस से बाहर निकलने का संकेत दिए जाने के बाद कीमतों में हुई बढ़त कुछ हद तक सीमित हो गई, लेकिन कीमतें एक महीने के उच्चतम स्तर के करीब बनी रहीं क्योंकि बाजार होर्मुज नाकेबंदी के प्रभावों के साथ-साथ ओपेक की आंतरिक स्थितियों में संभावित बदलावों के असर का आकलन कर रहा था।

इस कैलेंडर वर्ष में अब तक रुपया 5.24 फीसदी कमजोर हुआ है। मंगलवार को यह 94.55 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर का इस मुद्रा पर दबाव पड़ा।

इसके अलावा, घरेलू नकदी भी तंग रही क्योंकि आयातकों की मांग आपूर्ति से ज्यादा थी जबकि केंद्रीय बैंक ने कोई दखल नहीं दिया। हमें उम्मीद है कि रुपया 94.10 से 95.15 प्रति डॉलर के बीच सकारात्मक रुझान के साथ ट्रेड करेगा।

रुपये ने अप्रैल में हुई अपनी बढ़त गंवा दी क्योंकि आरबीआई द्वारा शुद्ध ओपन पोजिशन (एनओपी) की सीमाओं को सख़्त बनाने का असर कम होने लगा था। इन पाबंदियों ने शुरू में सट्टेबाज़ी वाली डॉलर पोजिशन को रोककर और घरेलू नकदी को सख़्त करके मुद्रा को सहारा दिया था।

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First Published - April 29, 2026 | 10:36 PM IST

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