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India-EU FTA: भारत-ईयू में बड़ा करार, बढ़ेगा साझा व्यापार; 2 अरब लोगों के बाजार तक पहुंच

इस समझौते से कपड़ा, फुटवियर, मत्स्य और फार्मा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा वहीं ईयू को कृ​षि-खाद्य, मशीनरी, चिकित्सा उपकरण तथा वाहन उद्योग में लाभ होगा

Last Updated- January 27, 2026 | 10:58 PM IST
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नई दिल्ली में मंगलवार को भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता संपन्न होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बीच में), यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा (बाएं) और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन। फोटो: पीटीआई

करीब दो दशक की बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने आज अपने 2 अरब लोगों के लिए व्यापार समझौता करने की घोषणा की, जिसके बाजार का कुल आकार 24 लाख करोड़ डॉलर से भी अ​धिक है। इस समझौते से कपड़ा, फुटवियर, मत्स्य और फार्मा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा वहीं ईयू को कृ​षि-खाद्य, मशीनरी, चिकित्सा उपकरण तथा वाहन उद्योग में लाभ होगा।

यह व्यापार समझौता ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका के 50 फीसदी शुल्क के बाद भारत अपने निर्यात के लिए बड़ा बाजार तलाश रहा है। ईयू के लिए यह तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तक पहुंच प्रदान करेगा जब अमेरिका के साथ उसके रिश्तों में तनाव दिख रहा है। व्यापार समझौते के लिए बातचीत खत्म होने की घोषणा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा एवं यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने की।

दोनों पक्षों ने अगले पांच वर्षों के लिए एक व्यापक रणनीतिक एजेंडा, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी, मोबिलिटी फ्रेमवर्क पर एमओयू आदि की भी घोषणा की। 2027 की शुरुआत में मुहर लगने के बाद यह समझौता बीते 5 वर्षों में भारत का 8वां व्यापार करार बन जाएगा। भारत ने 2021 से अभी तक 7 द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं जिनमें से ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के साथ 3 समझौते 2025 में किए गए थे।

मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) के तहत भारत के करीब 99.5 फीसदी मूल्य के निर्यात पर यूरोपीय संघ ने उदार शुल्क के लिए सहमति जताई है। इसी तरह भारत यूरोपीय संघ के 97 फीसदी आयात पर शुल्क रियायत देगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह समझौता ऐसे समय में स्थिरता देगा, जब दुनिया उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता संपन्न होने के बाद यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वाॅन डेर लेयेन के साथ एक संयुक्त संवादाता सम्मेलन में कहा, ‘यह केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है। यह साझा समृद्धि के लिए एक नया खाका है।’

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी यह सशक्त संदेश देगी कि वैश्विक चुनौतियों का सबसे अच्छा समाधान सहयोग है। ये टिप्पणियां यूरोप और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई हैं। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि ‘व्यापार समझौते नियम-आधारित आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं और साझा समृद्धि को बढ़ावा देते हैं। इसलिए आज का मुक्त व्यापार समझौता ऐतिहासिक महत्त्व रखता है।’

समय के साथ एफटीए दोनों पक्षों को एक-दूसरे के बाजार में ज्यादा पहुंच प्रदान करेगा। जिस दिन से यह करार लागू होगा उसी दिन से भारत ईयू के संग व्यापार मूल्य के लगभग 30 फीसदी पर शुल्क शून्य कर देगा। 10 साल में चरणबद्ध तरीके से इसके दायरे में दोनों देशों के व्यापार मूल्य का 93 फीसदी आ जाएगा। दूसरी ओर यूरोपीय संघ पहले दिन से ही 90 फीसदी भारतीय निर्यात पर से शुल्क खत्म कर देगा और बाकी पर 7 साल में धीरे-धीरे शुल्क खत्म किए जाएंगे।

वा​णिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के लिए फायदे का सौदा है। गोयल ने कहा, ‘हमने अलग-अलग आय वर्ग वाले दो देशों के बीच आ​र्थिक विकास में अंतर को दूर करने की कोशिश की है लेकिन दोनों अर्थव्यवस्था की पूरक ताकतों पर ध्यान दिया गया है ताकि सभी 28 देशों को सामूहिक फायदा हो।’

इस समझौते से बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारत-ईयू के रिश्तों में नई धार आने की उम्मीद है। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि ईयू का औसत शुल्क लगभग 4 फीसदी तक कम होने से समुद्री उत्पाद, कपड़े, रत्न एवं आभूषण, रसायन, चमड़ा, प्लास्टिक और रबर, फर्नीचर, होम डेकोर, मूल धातुओं जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों को फायदा होगा क्योंकि ईयू इनमें से ज्यादातर उत्पाद श्रेणी पर अभी 10 फीसदी से अ​धिक आयात शुल्क लगाता है।

27 सदस्यों वाले यूरोपीय संघ को भारत के विशाल बाजार तक व्यापक पहुंच का लाभ मिलेगा। सर्वा​धिक तरजीही देश के मामले में भारत में औसत शुल्क 16 फीसदी जबकि शराब और वाहन जैसे उत्पादों पर 100 फसदी से भी ज्यादा शुल्क है। यूरोपीय आयोग ने कहा कि भारत ने ईयू को किसी भी दूसरे व्यापार भागीदार से ज्यादा शुल्क में कटौती का लाभ देने पर सहमति जताई है। वाहन, कृ​षि और स्टील जैसे कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में शुल्क धीरे-धीरे कम किया जाएगा और इनमें शुल्क कोटा होगा।

वाहन क्षेत्र के मामले में भारत ने कारों पर शुल्क 110 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करने के लिए कोटा आधारित व्यवस्था पर सहमति जताई है, जिसमें हर साल 2,50,000 गाड़ियों के आयात का कोटा होगा। पहले साल में शुल्क को घटाकर 30-35 फीसदी किया जाएगा। भारत घरेलू विनिर्माण की सुरक्षा के लिए सस्ती कार सेगमेंट में यूरोपीय कारों के आयात को सीमित करेगा और 25 लाख रुपये तक की कारें इसके दायरे में आएंगी।

प्रीमियम सेगमेंट में ज्यादा कोटा दिया जाएगा, जहां स्थानीय कंपनियों की मौजूदगी कम है। भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए इन कोटा के अलावा शुल्क में कोई कटौती का लाभ नहीं दिया जाएगा। दूसरी ओर ईयू को दिए गए हर कार कोटा के लिए भारत को अपने निर्यात के लिए 2.5 गुना ज्यादा पहुंच मिलेगा। ईयू के इलेक्ट्रिक वाहनों को तत्काल बाजार पहुंच नहीं मिलेगी। इले​क्ट्रिक वाहनों के लिए कोटा पांच साल बाद शुरू होगा, जिससे स्थानीय विनिर्माताओं को विस्तार करने के लिए काफी समय मिलेगा।

इस तरह के शुल्क ढांचे के पीछे का कारण समझाते हुए गोयल ने कहा कि ईयू का ध्यान ज्यादातर महंगी गाड़ियों पर रहा है क्योंकि वे 15,000-20,000 यूरो से कम कीमत वाली कारें नहीं बनाते हैं। दूसरी ओर भारत छोटी और किफायती कारें बनाता है।

गोयल ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम बहुत ही अच्छे समझौते पर पहुंच पाए हैं जहां जर्मनी का वाहन उद्योग असल दिलचस्पी वाले क्षेत्र में ज्यादा बाजार पहुंच पाकर बहुत खुश है जबकि भारतीय उद्योग खुश है कि हम छोटे और कम कीमत वाले वाहन सेगमेंट वाले क्षेत्र को सुर​क्षित रखने में सफल रहे हैं।’

इसी तरह ईयू के दिलचस्पी वाले विशेष क्षेत्र शराब के मामले में जहां भारत 150 फीसदी आयात शुल्क लगाता है, उसे शुरू में घटाकर 75 फीसदी कर दिया जाएगा और अंत तक शुल्क घटकर प्रीमियम शराब पर 20 फीसदी और मध्यम स्तर की शराब पर 30 फीसदी तक रह जाएगा। स्पिरिट पर शुल्क 40 फीसदी और बीयर पर 50 फीसदी हो जाएगा।

यूरोपीय आयोग के अनुसार इस समझौते से ईयू के कृ​षि खाद्य उत्पादों के निर्यात पर अक्सर लगने वाला बहुत ज्यादा शुल्क खत्म या कम हो जाएगा जिससे यूरोप के किसानों के लिए बड़ा बाजार खुल जाएगा। बीफ, चीनी या चावल जैसे संवेदनशील कृ​षि क्षेत्र में यूरोप शुल्क में कोई राहत नहीं देगा। इसी तरह भारत ने डेरी, अनाज, पोल्ट्री, सोयामील, कुछ फल और स​ब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्र को सुरक्षित रखा है और निर्यात वृद्धि को घरेलू प्राथमिकता के साथ संतुलित किया है।

सरकारी अधिकारियों ने कहा कि 1 जनवरी से लागू ईयू का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) नियमन बातचीत में सबसे मुश्किल मुद्दों में से एक था क्योंकि यूरोपीय संघ किसी भी देश को खास रियायत देने को तैयार नहीं था। हालांकि दूसरे देश को दी जाने वाली कोई भी सीबीएएम रियायत भारत पर भी लागू होगी।

भारतीय कंपनियों को अपना कार्बन डेटा सत्यापित करने और ईयू के नियमों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने के लिए एक तकनीक समूह बनाया जाएगा। इससे भारत के भविष्य के कार्बन मूल्य निर्धारण प्रणाली को पहचान मिल सकती है और दोहरे कराधान से बचा जा सकता है। सेवा उद्योग में ईयू ने 144 उप-क्षेत्र और भारत ने 102 उप-क्षेत्र खोले हैं। इसके अलावा छात्रों की आवाजाही को लेकर भी प्रतिबद्धताएं की गई हैं। भारत को पढ़ाई के बाद वर्क वीजा पर भी कुछ प्रतिबद्धताएं मिली हैं।

इस समझौते से ईयू कंपनियों को भारत के सेवा बाजार में विशेष पहुंच मिलेगी जिसमें वित्तीय सेवाएं और मैरीटाइम सेवाएं प्रमुख हैं। आयोग ने कहा कि किसी भी व्यापार करार में वित्तीय सेवाओं पर भारत की यह सबसे बड़ी प्रतिबद्धता है जो दूसरे व्यापार भागीदारों के साथ की गई प्रतिबद्धता से कहीं ज्यादा है।

समझौते में 21 अध्याय हैं, जिनमें व्यापार में तकनीकी अड़चनें, बौद्धिक संपदा अ​​धिकार, सब्सिडी, धोखाधड़ी रोधी, मूल देश के नियम जैसे क्षेत्र शामिल हैं। गैर-सेवा खंड में निवेश को उदार बनाने वाले अध्याय को फिलहाल हटा दिया गया है लेकिन दोनों ने बातचीत जारी रखने और समझौता लागू होने के दो साल के अंदर इसे अंतिम रूप देने का फैसला किया गया है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार पाठ की कानूनी जांच-पड़ताल चल रही है जिसका मकसद अगले पांच से छह महीनों में प्रक्रिया पूरा करके समझौते पर हस्ताक्षर करना है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ एफटीए व्यावसायिक रूप से अहम करार है, जो शुल्क में भारी कटौती के साथ ही दुनिया के सबसे समृद्ध बाजार में से एक तक पहुंच को मजबूत करता है।

First Published - January 27, 2026 | 10:42 PM IST

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