टेक्नॉलजी, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में सहयोग गहन करने के लिए भारत और यूरोपीय संघ ने एक संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडे का समर्थन किया है। इस फ्रेमवर्क का उद्देश्य दोनों भागीदारों के लिए ठोस, पारस्परिक रूप से लाभकारी परिणाम देने के लिए सहयोग को बेहतर ढंग से समन्वित करना है, जिसके निहितार्थ उनकी सीमाओं से परे तक फैले हुए हैं।
एजेंडे में महत्त्वपूर्ण उभरती तकनीकों और स्टार्टअप को सहयोग किया जाना शामिल है। इममें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड सेमीकंडक्टर्स, क्लीन टेक्नॉलजी और बायोटेक्नॉलजी में मिलजुलकर शोध करने को बढ़ावा दिया गया है।
इस साझेदारी से भारत-ईयू नवाचार केंद्र बनाने में मदद मिलेगी। ये केंद्र बातचीत, ज्ञान साझा करने और महत्त्वपूर्ण उभरती तकनीकों में संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देंगे। ये नीति निर्माताओं, उद्योग के अग्रणी लोगों, स्टार्टअप, निवेशकों और सिविल सोसाइटी के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने में मददगार होंगे, जहां प्राथमिकताओं को चिह्नित किया जा सकेगा और नवाचार पर जोर दिया जा सकेगा।
शुरुआती स्तर के तालमेल से प्रमुख तकनीकों को उद्योगों में इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। इसका मकसद निजी क्षेत्र की साझेदारी को गति देना है।
एजेंडे में भारत-ईयू स्टार्टअप पार्टनरशिप का भी प्रस्ताव किया गया है। यह यूरोपियन इनोवेशन काउंसिल, स्टाटअप इंडिया और ईयू के सदस्य देशों के सहयोग से किया जाएगा। इससे यूरोप और भारत की एसएमई, इनक्यूबेटर्स, और स्टार्टअप में सीमा पार निवेश, को-क्रिएशन और डीप-टेक को बढ़ावा मिलेगा।
इस सहयोग से दोनों पक्षों के लिए लाभकारी शोध एवं विकास, प्रतिभाओं के आदान प्रदान से लेकर एडवांस सेमीकंडक्टर्स के तकनीकी विकास तक को बल मिलेगा। एआई ऐप्लीकेशंस के लिए डिजाइन और प्रोटोटाइपिंग पर विशेष ध्यान होगा। इससे भारत की डिजाइनिंग की ताकत और यूरोपीय संघ के शोध इन्फ्राट्रक्चर का लाभ उठाया जा सकेगा। समझौते के साझेदार रणनीतिक एआई डोमेन में सहयोग कर सकेंगे। इसमें बड़े लैंग्वेज मॉडल, मल्टी लिंगुअल डेटासेट और एआई सॉल्यूशन शामिल हैं।