भारत के कल पुर्जा विनिर्माताओं और यूरोप के कार विनिर्माताओं ने भारत-यूरोप व्यापार समझौते का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस कदम से वैश्विक ऑटोमोटिव मूल्य श्रृंखला से भारत के जुड़ाव को बल मिलेगा। साथ ही आयातित लग्जरी वाहन सस्ते होने से भारतीय बाजार में इनकी मांग में तेजी आएगी।
समझौते के तहत यूरोप के वाहनों पर भारत कोटे के मुताबिक आयात शुल्क घटाने पर राजी हो गया है। इसके तहत 5 वर्षों में शुल्क घटकर 10 प्रतिशत कर दिए जाएंगे। इससे मर्सिडीज-बेंज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी, फरारी, पोर्श, लैंबोर्गिनी, रॉल्स रॉयस और बेंटली जैसी महंगी यूपोरीय कारें भारतीय बाजार में सस्ती होंगी। भारत ने ब्रिटेन के साथ हुए समझौते में करीब 37,000 वाहनों के कोटे पर समझौता किया है। यह करार यूरोप से करीब 2,50,000 वाहनों को कम शुल्क पर आयात की अनुमति देगा।
इस समय भारत के बाजार में बनी कारों पर 16.5 प्रतिशत बुनियादी सीमा शुल्क लगता है। वहीं यूरोपीय संघ (ईयू) से आयातित वाहनों पर 125 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। शुल्क कम होने से भारत में इन कारों की शोरूम कीमतें उल्लेखनीय रूप से कम हो जाएंगी।
जानकारी के मुताबिक व्यापक बाजार पर मोटे तौर पर असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि ये रियायतें मुख्य रूप से 25 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कारों पर लागू होंगी।
इसके बावजूद वैश्विक कंपनियों से प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना को लेकर बाजार में चली अटकलों के चलते मंगलवार को बीएसई में महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, मारुति और टाटा मोटर्स जैसे प्रमुख भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई और इनकी कीमतें क्रमशः 4.19 प्रतिशत, 1.48 प्रतिशत और 1.06 प्रतिशत तक गिर गईं। वाहनों के कल पुर्जे बनाने वाली कंपनियों को निर्यात बढ़ने, तकनीकी साझेदारी और निवेश पर आधारित वृद्धि की उम्मीद है। भारत के कल पुर्जा निर्यात में करीब 30 प्रतिशत यूरोपीय संघ जाता है। वित्त वर्ष 2025 में भारत से इस क्षेत्र में 6.75 अरब डॉलर के कल पुर्जों का निर्यात हुआ, जबकि यूरोपीय संघ से आयात 5.77 अरब डॉलर था।
बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के प्रेसिडेंट और मुख्य कार्याधिकारी हरदीप सिंह बराड़ ने कहा, ‘निकट भविष्य में हम कीमतों में तत्काल बदलाव की उम्मीद नहीं कर रहे हैं, लेकिन एफटीए से नए और खास मॉडल पेश करने के अवसर मिल सकते हैं। अगर इनकी मांग बढ़ती है, तो समय के साथ इनके स्थानीयकरण को समर्थन मिल सकता है।’
मर्सिडीज बेंज इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी संतोष अय्यर ने कहा, ‘एफटीए से भारतीय वाहन क्षेत्र के भीतर तकनीकी नवाचार और सतत विकास को मजबूती से बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसमें फ्यूचर मोबिलिटी पर खास ध्यान दिया जा सकता है।’ कंपनी को निकट भविष्य में एफटीए के कारण मर्सिडीज बेंज वाहनों की कीमतों में कमी की संभावना नहीं दिख रही है। अभी मर्सिडीज की कुल बिक्री का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा ‘मेड इन इंडिया’ के तहत स्थानीय रूप से निर्मित मॉडल का है और बिक्री का केवल 5 प्रतिशत ही ईयू से सीबीयू आयात के माध्यम से आता है।
ऑडी इंडिया के ब्रांड डायरेक्टर बलबीर सिंह ढिल्लों ने कहा, ‘कीमत और बाजार पर किसी प्रभाव का आकलन तभी किया जा सकता है जब अंतिम बातें सामने आ जाएं और और कार्यान्वयन की समय सीमा सहित उनकी सावधानीपूर्वक समीक्षा की जाए। इससे यूरोपीय वाहन निर्माताओं को भारत में निवेश करने, नवाचार करने और ग्राहकों को बेहतर सेवा देने के लिए स्थिर और अच्छा माहौल मिलेगा।’