facebookmetapixel
Advertisement
तेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमणसरकार का बड़ा फैसला: पीएनजी नेटवर्क वाले इलाकों में नहीं मिलेगा एलपीजी सिलिंडर

India-EU FTA से ऑटो निर्यात को रफ्तार: यूरोप में भारत बन सकता हैं कार मैन्युफैक्चरिंग हब

Advertisement

कई मूल उपकरण विनिर्माता (ओईएम) यूरोपीय संघ के बाजार में चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा को मात देने के लिए भारत की विनिर्माण लागत के लाभ का इस्तेमाल करने की संभावना देख रहे हैं

Last Updated- January 28, 2026 | 9:50 PM IST
Auto Export

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए ) से यूरोप को होने वाले भारत के कार निर्यात को काफी बढ़ावा मिलने की संभावना है। कई मूल उपकरण विनिर्माता (ओईएम) यूरोपीय संघ के बाजार में चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा को मात देने के लिए भारत की विनिर्माण लागत के लाभ का इस्तेमाल करने की संभावना देख रहे हैं।

रेनो इंडिया के प्रबंध निदेशक वेंकटराम मामिल्लापल्ले ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते से अब ओईएम भारत से लेफ्ट-हैंड-ड्राइव वाहनों का निर्यात कर सकेंगी। उन्होंने कहा, आज हममें से ज्यादातर कंपनियां राइट-हैंड-ड्राइव वाहनों का निर्यात करती हैं। अब हम यूरोप जैसे प्रतिस्पर्धी बाजार में लेफ्ट-हैंड-ड्राइव वाहन निर्यात कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि एक यूरोपीय ब्रांड होने के नाते रेनो कंपनी इस एफटीए के जरिए भारत में अपनी उपस्थिति का पूरा फायदा उठा सकती है।

उन्होंने कहा, हम यूरोप में बनने वाली कारों को यहां बनाना शुरू कर सकते हैं। इंजीनियरिंग, आपूर्तिकर्ता और विनिर्माण के भारत में स्थानीयकरण होने से हमें लागत में अधिक लाभ मिलेगा और प्रतिस्पर्धी क्षमता भी बढ़ेगी क्योंकि अब हम कम शुल्क पर सभी निर्यात करेंगे।

मामिल्लापल्ले का मानना है कि इस एफटीए से यूरोप और भारत दोनों को फायदा होगा। उन्होंने कहा, हमें विनिर्माण से लाभ होगा जबकि यूरोपीय संघ को प्रतिस्पर्धा से लाभ होगा क्योंकि चीन की कंपनियों का उन पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में चीन की कंपनियों ने यूरोपीय संघ में बाजार हिस्सेदारी हासिल की है।

कुछ अनुमानों के अनुसार 2025 के अंत तक यह 6 फीसदी से अधिक हो जाएगी। यह यूरोपीय संघ में चीन की कंपनियों की 3 फीसदी हिस्सेदारी से लगभग दोगुनी है। आयात की बात करें तो रेनो चेन्नई बंदरगाह के माध्यम से उच्च श्रेणी के वाहनों का आयात करेगी और उनकी मात्रा सीमित रखेगी। सायम के आंकड़ों के अनुसार रेनो इंडिया ने अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच 12,841 वाहनों का निर्यात किया है, जो पिछले वर्ष के 9687 वाहनों से ज्यादा है।

भारत से ऑटोमोबाइल का निर्यात मुख्य रूप से एशियाई और अफ्रीकी देशों के साथ-साथ कुछ लैटिन अमेरिकी बाजारों को होता है।

एक अन्य यूरोपीय कंपनी स्कोडा ऑटो फोक्सवैगन इंडिया भी भारत को अपने निर्यात केंद्र के रूप में इस्तेमाल करती है। वह पिछले वर्ष अप्रैल से दिसंबर के बीच 31,000 से अधिक वाहन निर्यात कर चुकी है। कंपनी के करीबी सूत्रों ने बताया कि एफटीए के रास्ते निश्चित ही भारत से निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।

सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, यूरोपीय ग्राहकों की पसंद काफी स्पष्ट होती है। फोक्सवैगन समूह ऐसे वाहन बनाने पर विचार कर सकता है, जो ग्राहकों की इन प्राथमिकताओं को पूरा करें। उदाहरण के लिए वह रंग, बॉडी टाइप आदि और भारत में कम लागत के विनिर्माण के लाभ का इस्तेमाल करके प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कारें बना सकता है।

स्कोडा ऑटो और फोक्सवैगन इंडिया ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की बारीकियों को लेकर अभी तक स्पष्टता न होने के कारण टिप्पणी से इनकार कर दिया। इस बीच मारुति सुजूकी जैसी कंपनियों ने अपनी इलेक्ट्रिक विटारा का यूरोप में निर्यात शुरू कर दिया है। हालांकि, निर्यात का वॉल्यूम अभी कम है और लक्ष्य दुनिया भर के 100 देशों में निर्यात करना है। सुजूकी मोटर का हंगरी में एक संयंत्र है और वह यूरोप को आपूर्ति के लिए इसका उपयोग कर सकती है।

ऑटोमोबाइल क्षेत्र की प्रमुख कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा ने संकेत दिया है कि वह भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का लाभ उठाते हुए वित्त वर्ष 2027 तक इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात करके ब्रिटेन के बाजार में प्रवेश की योजना बना रही है। कंपनी ने यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते पर कोई टिप्पणी नहीं की है क्योंकि यह समझौता अभी लागू नहीं हुआ है।

Advertisement
First Published - January 28, 2026 | 9:45 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement