पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि ओडिशा और कर्नाटक में भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) की दो प्रमुख विस्तार परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से उपजे ऊर्जा संकट को देखते हुए सरकार देश भर में पर्याप्त एसपीआर स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दे रही है।
मंत्रालय ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस पर संसदीय स्थायी समिति को काम की स्थिति पर पूछे गए सवाल के जवाब में बताया, ‘ओडिशा के चंद्रिखोल में पेट्रोलियम भंडार के लिए अधिग्रहीत होने वाली भूमि और मुआवजे की दर को अंतिम रूप दिया जा रहा है जबकि उडुपी के पास पाडुर में भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा होने वाला है।’
इसमें कहा गया है कि चंद्रिखोल में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। ओडिशा सरकार ने परियोजना के लिए 400 एकड़ भूमि को मंजूरी दे दी है और इंडिया स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड को 363.3 एकड़ के लिए मांग पत्र मिल गया है। मंत्रालय ने कहा, ‘शेष 36.7 एकड़ के लिए मांग पत्र शीघ्र मिलने की उम्मीद है।’
कंपनी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और कर्नाटक के मंगलूर और पाडुर में 53.3 लाख टन कच्चे तेल की कुल क्षमता वाली एसपीआर स्थापित की हैं। ये एसपीआर आपूर्ति संकट के समय बफर के रूप में काम कर सकती हैं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में एक सवाल के लिखित उत्तर में कहा, ‘कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडारण के लिए वर्तमान कुल राष्ट्रीय क्षमता 74 दिन है, जिसमें तेल विपणन कंपनियों की 64.5 दिनों की भंडारण सुविधाओं की क्षमता शामिल है।’
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्यता मानदंड के अनुसार सदस्य देशों को पिछले वर्ष के शुद्ध आयात के 90 दिनों के बराबर कच्चे तेल और उत्पाद भंडार बनाए रखने की आवश्यकता होती है।
सरकार ने जुलाई 2021 में ओडिशा के चंद्रिखोल और कर्नाटक के पाडुर में 65 लाख टन भंडारण क्षमता वाली दो अतिरिक्त वाणिज्यिक-सह-रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व सुविधाओं की स्थापना को पीपीपी मॉडल के तहत मंजूरी दी थी, जिसमें कुल परियोजना लागत 14,527 करोड़ रुपये रखी गई थी और व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण कुल परियोजना लागत का 60 प्रतिशत तक सीमित था।