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अब जमीन बनेगी डिजिटल टोकन! महाराष्ट्र ला रहा है देश का पहला ब्लॉकचेन लैंड कानून

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महाराष्ट्र सरकार जमीन के ब्लॉकचेन आधारित टोकनाइजेशन के लिए नया कानून लाने की तैयारी में है, जिससे प्रॉपर्टी लेन-देन और स्वामित्व प्रक्रिया डिजिटल हो सकेगी।

Last Updated- July 22, 2026 | 8:20 AM IST
devendra fadnavis
Representative image

महाराष्ट्र सरकार ने ‘महाराष्ट्र डिजिटाइजेशन ऐंड एक्सचेंज ऑफ लैंड टोकन ऐसेट’ (डेल्टा) अधिनियम पर कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। इस अधिनियम का मकसद अचल संपत्तियों का ब्लॉकचेन-आधारित टोकनाइजेशन करना है। टोकनाइजेशन जानकारियां सुरक्षित रखने की प्रक्रिया है जिसमें संवेदनशील जानकारियां टोकन में तब्दील कर दी जाती हैं।

राज्य सरकार जमीन की वास्तविक क्षमता या अव्यक्त मूल्य का लाभ लेने और वर्ष 2030 तक 1 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह में राजस्व के नए स्रोत तैयार करना चाह रही है। सोमवार को राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में राज्य ने प्रस्तावित अधिनियम के मसौदे पर चर्चा की। इस अधिनियम का मकसद ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल कर जमीन से जुड़ी जानकारियों के डिजिटलीकरण टोकनाइजेशन के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करना है।

मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से जारी एक वक्तव्य के मुताबिक फडणवीस ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अचल संपत्तियों की अव्यक्त मूल्य का इस्तेमाल जनहित में करने के लिए नया कानून प्रस्तावित करें। उन्होंने कहा कि कानून में ऐसी संपत्तियों के अव्यक्त मूल्य का लाभ उठाने की क्षमता होनी चाहिए, साथ ही ब्लॉकचेन-आधारित लेन-देन के लिए कानूनी मोर्चे पर स्थिति पूरी तरह साफ होनी चाहिए। इस प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री ने कानून का एक व्यापक मसौदा तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश दिया। इस समिति में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी), बीएसई और एनएसई के प्रतिनिधियों के साथ-साथ इस क्षेत्र की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ और अनुभवी पेशेवर शामिल होंगे। प्रस्तावित कानून का मकसद एक पूर्ण डिजिटल ढांचा तैयार करना जिसमें अचल संपत्तियों को उनके असल मूल्य के आधार पर टोकन में बदला जा सके। इससे ब्लॉकचेन तकनीक के जरिये लेन-देन हो सकेंगे जिसमें जमीन के मूल्य के आधार पर जारी किए गए टोकन के माध्यम से लेन-देन होंगे।

सरकार ने कहा कि इस कानूनी ढांचे का मकसद ऐसे लेन-देन को कानूनी सुरक्षा देना और जायदाद के मालिकाना हक को लेकर स्पष्टता लाना है। फडणवीस ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे कानून को अंतिम रूप देने से पहले परिसंपत्ति टोकेनाइजेशन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों, नियमों और काम-काज के तरीकों का अध्ययन करें। सरकार के मुताबिक अगर महाराष्ट्र इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ता है तो वह इस तरह का कानून लाने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानून सुधारों के मोर्चे पर अग्रणी रहने के महाराष्ट्र के इतिहास को मजबूती से आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस नए कानून की मदद से राज्य को शासन और आर्थिक विकास के लिए नई तकनीक अपनाने में भी सक्षम होना चाहिए। राज्य सरकार का मानना है कि जायदाद के लेन-देन को डिजिटल रूप देने से जायदाद की खरीद-बिक्री और ऋम के लिए बैंकों के पास जायदाद गिरवी रखने में लगने वाला समय काफी कम हो सकता है। राज्य सरकार को यह भी उम्मीद है कि टोकेनाइजेशन से जायदाद मालिकों को अपनी संपत्ति के वास्तविक मूल्य का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।

फडणवीस ने शहरी विकास विभाग और कानून व न्याय विभाग को प्रस्तावित कानून पर काम में तेजी लाने, साथ ही केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए संबंधित नियमों की समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि ब्लॉकचेन-आधारित परिसंपत्ति टोकेनाइजेशन प्लेटफॉर्म दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं जिसे देखते हुए महाराष्ट्र को एक अनुकूल कानूनी ढांचा बनाने के लिए तेजी से कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि लेन-देन की दक्षता में सुधार के अलावा प्रस्तावित कानून राज्य के राजस्व को भी बढ़ा सकता है।

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First Published - July 22, 2026 | 8:20 AM IST

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