अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ लगाने के प्रस्ताव के बाद बुधवार को भारतीय फार्मा शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की, जिसके चलते नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर निफ्टी फार्मा इंडेक्स इंट्रा-डे कारोबार में करीब 2 फीसदी तक फिसल गया। हालांकि शुरुआती गिरावट के बाद इंडेक्स ने कुछ रिकवरी भी दर्ज की।
बुधवार के इंट्रा-डे कारोबार में निफ्टी फार्मा इंडेक्स 1.7 फीसदी गिरकर 25,639.70 के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला और सुबह करीब 9:20 बजे यह करीब 1 फीसदी की गिरावट के साथ 25,385.30 पर कारोबार करता दिखा।
वहीं, इसी दौरान निफ्टी 50 भी कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा था और यह 0.36 फीसदी की गिरावट के साथ 24,101.15 पर था।
बाजार में बिकवाली का असर कई प्रमुख फार्मा कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया।
करीब 3 फीसदी तक टूटने वाले शेयरों में शामिल रहे:
वहीं Lupin, Wockhardt, Gland Pharma और Sun Pharmaceutical के शेयरों में करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का उद्देश्य अमेरिका में घरेलू फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना बताया गया है।
हालांकि बुधवार को गिरावट देखने को मिली, लेकिन लंबी अवधि के प्रदर्शन पर नजर डालें तो फार्मा सेक्टर अब भी मजबूत स्थिति में है।
पिछले एक महीने में निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने करीब 7 फीसदी की बढ़त दर्ज की है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी 50 में केवल 0.72 फीसदी की तेजी आई।
वहीं कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 15 फीसदी चढ़ चुका है। इसके मुकाबले बेंचमार्क निफ्टी 50 में 7.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
फार्मा सेक्टर ने हाल के महीनों में मजबूत प्रदर्शन किया है। 16 जुलाई 2026 को निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने 26,135.75 का रिकॉर्ड उच्च स्तर भी छुआ था। हालांकि अब अमेरिकी टैरिफ प्रस्ताव और मुनाफावसूली के चलते इस सेक्टर में अल्पकालिक दबाव देखने को मिल रहा है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयातित जेनेरिक दवाओं पर नया टैरिफ ढांचा लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत जो कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित नहीं करेंगी, उन पर अगस्त 2028 से 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाएगा। इसके एक साल बाद यानी अगस्त 2029 से यह शुल्क बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्ताव का उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को दोबारा अमेरिका में लाना और घरेलू फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। यदि यह नीति लागू होती है, तो अमेरिकी बाजार में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली भारतीय दवा कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है।
1 अगस्त 2026 से शुरू होने वाले दो वर्षों तक आयातित जेनेरिक दवाओं पर कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। इस दौरान कंपनियों को अमेरिका में अपनी उत्पादन इकाइयां स्थापित करने का मौका मिलेगा।
अगर कोई कंपनी तय समय सीमा के भीतर अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग शुरू नहीं करती है, तो अगस्त 2028 से उस पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। इसके बाद अगस्त 2029 से यह शुल्क बढ़कर 200 प्रतिशत हो जाएगा।
ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव केवल जेनेरिक दवाओं पर लागू होगा। पेटेंट, ब्रांडेड और इनोवेटिव दवाओं के लिए मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि इस कदम का मकसद अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का घरेलू उत्पादन बढ़ाना और सप्लाई चेन को मजबूत बनाना है।
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो अमेरिका को बड़े पैमाने पर जेनेरिक दवाएं निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। अमेरिका भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए सबसे बड़े निर्यात बाजारों में से एक है, इसलिए इस फैसले का असर कारोबार और निवेशकों की धारणा दोनों पर पड़ सकता है।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, इस घोषणा के बाद Gland Pharma, Aurobindo Pharma, Granules, Dr. Reddys Laboratories, Zydus Lifesciences जैसी भारतीय कंपनियों के शेयरों पर अल्पावधि में दबाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, ब्रोकरेज का कहना है कि अभी इस प्रस्ताव का विस्तृत मसौदा सामने आना बाकी है और आगे की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
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*डिस्क्लेमर : इस खबर में दिए गए शेयरों से जुड़े विचार और अनुमान संबंधित ब्रोकरेज के हैं। इन्हें बिजनेस स्टैंडर्ड की सलाह या राय न समझें। निवेश से पहले अपनी समझ और वित्तीय सलाहकार की सलाह के आधार पर ही निर्णय लें।