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राष्ट्रपति मुर्मू का बजट सत्र अभिभाषण: देश की आर्थिक बुनियाद मजबूत, ईयू-एफटीए से रोजगार और विकास को मिलेगी नई रफ्तार

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उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में भी देश का रिकॉर्ड और बेहतर हुआ है, जिसका सीधा लाभ गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को मिला है

Last Updated- January 28, 2026 | 10:52 PM IST
Droupadi Murmu
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को किया संबोधित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश की आर्थिक बुनियाद काफी मजबूत हुई है और सरकार की नीतियों के चलते नागरिकों की आय भी बढ़ी है। राष्ट्रपति ने बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत पूरी होना भारत के विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्रों को गति देगा और युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर पैदा करेगा।

राष्ट्रपति ने कहा, ‘पिछले 11 वर्षों में देश की आर्थिक बुनियाद काफी सशक्त हुई है। विभिन्न वैश्विक संकटों से उपजी चुनौतीपूर्ण परि​स्थितियों के बीच भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।’ उल्लेखनीय है कि देश की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में अनुमान से अधिक 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी जो पिछले डेढ़ साल में सबसे अधिक है।

उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में भी देश का रिकॉर्ड और बेहतर हुआ है, जिसका सीधा लाभ गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को मिला है। राष्ट्रपति ने सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘ सरकार ‘रिफॉर्म्स एक्सप्रेस’ के रास्ते पर चल रही है। पुराने नियमों और प्रावधानों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से निरंतर बदला जा रहा है।’

उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में अगली पीढ़ी के ऐतिहासिक सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे नागरिकों को करीब एक लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है। राष्ट्रपति ने आयकर कानून में बदलाव का भी उल्लेख करते हुए कहा कि 12 लाख रुपये तक की आय को कर-मुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को अभूतपूर्व लाभ मिला है और अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिली है।

मैकाले के षड्यंत्रों से बनी हीनभावना को तोड़ा

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि गुलामी के कालखंड में मैकाले के षड्यंत्रों ने भारत के लोगों में हीनभावना भरी थी, लेकिन आजादी के बाद पहली बार इस सरकार ने ही उसे तोड़ने का साहस किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जितना महत्त्व आधुनिक विकास को देना है, उतना ही अपने राष्ट्रीय आत्मसम्मान और सांस्कृतिक स्वाभिमान को भी देना है।

उन्होंने कहा कि आज देश अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और संवारने के लिए हर मोर्चे पर काम कर रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने अभिभाषण में महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक कई महापुरुषों का स्मरण किया तथा सांसदों का आह्वान किया कि वे मतभेद के बावजूद राष्ट्र से जुड़े विषयों पर एकमत रहें।

उन्होंने कहा, ‘विभिन्न मतों, अलग-अलग विचारों के बीच ये सर्वमान्य है कि राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं। पूज्य महात्मा गांधी, नेहरू जी, बाबा साहेब, सरदार पटेल, जेपी जी, लोहिया जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल जी, सभी इसी विचार के रहे कि लोकतंत्र में विषयों पर मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन कुछ विषय मतभेदों से परे हैं।’

बीते एक दशक में भारत में खेल से जुड़ी हर व्यवस्था में सुधार होने का उल्लेख करते हुए मुर्मू ने कहा कि सरकार ने ‘खेलो भारत’ नीति बनाई है और देश की तैयारियों का परिणाम है कि उसे 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी का दायित्व दिया गया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान समय की जटिल वैश्विक परिस्थितियों में भारत एक सेतु की भूमिका निभा रहा है और उसने संतुलन, निष्पक्षता तथा मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी व्यापक भूमिका और सकारात्मक सक्रियता के साथ आज कई वैश्विक संगठनों में बड़ी जिम्मेदारियां निभा रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार सेमीकंडक्टर के अलावा दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में ‘मिशन मोड’ पर काम कर रही है। सरकार ने पिछले साल देश के भीतर एवं अपतटीय स्थानों पर इन खनिजों की खोज को बढ़ावा देने के लिए 16,300 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय दुर्लभ खनिज मिशन (एनसीएमएम) को मंजूरी दी थी।

संसद के बजट सत्र के पहले दिन बुधवार को लोक सभा और राज्य सभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिए गए अभिभाषण की समाप्ति के बाद उसकी एक प्रति उच्च सदन के पटल पर रखी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रेरक अभिभाषण ने हाल के समय में भारत की उल्लेखनीय विकास यात्रा पर प्रकाश डाला और भविष्य के लिए एक स्पष्ट दिशा दिखाई।

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First Published - January 28, 2026 | 10:47 PM IST

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