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India-EU FTA: समुद्री उत्पादों के लिए खुलेगा यूरोप का रास्ता, निर्यात में उछाल की उम्मीद

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असल में गैर-टैरिफ वाली रुकावटें भारत से कृषि और कृषि उत्पादों की सुगम आवाजाही में बड़ी बाधा बन सकती हैं क्योंकि जांच और सुरक्षा के ईयू के कुछ कड़े मानक हैं

Last Updated- January 27, 2026 | 10:39 PM IST
seafood
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

अमेरिका के दंडात्मक टैरिफ के कड़े दौर का सामना करने वाले भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात को भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत टैरिफ में 26 प्रतिशत कमी के बाद इसे बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। अलबत्ता गैर-टैरिफ वाली रुकावटों के संबंध में चिंताएं अब भी बरकरार हैं, जो यूरोपीय संघ के साथ समुद्री उत्पाद व्यापार का प्रमुख पहलू हैं।

असल में गैर-टैरिफ वाली रुकावटें भारत से कृषि और कृषि उत्पादों की सुगम आवाजाही में बड़ी बाधा बन सकती हैं क्योंकि जांच और सुरक्षा के ईयू के कुछ कड़े मानक हैं। एफटीए के संबंध में ईयू के बयान में कहा गया है, ‘हम घरेलू और आयातित उत्पादों के बीच उत्पादन के मानकों की संभावित व्यवस्था का विश्लेषण करने के लिए प्रभाव का आकलन करेंगे, विशेष रूप से कीटनाशकों और पशु कल्याण के संबंध में तथा तीसरे देशों के लिए खाद्य सुरक्षा जांच की संख्या बढ़ाएंगे।’

इनक्रेड रिसर्च के नितिन अवस्थी के अनुसार भारत के लिए यूरोपीय संघ का बाजार ऐतिहासिक रूप से भारत के समुद्री उत्पादों के लिए 4 प्रतिशत से 12 प्रतिशत के दायरे में टैरिफ और अनुपालन के कड़े मानदंडों (गैर-टैरिफ बाधाओं) के संयोजन के कारण बाधित था, जिसके कारण भारी देरी और नामंजूरी होती थी।

इन सब के कारण 4 से 12 प्रतिशत शुल्क से भी ज्यादा लागत आती थी, लेकिन अब यह बाजार सार्थक रूप से फिर से खुलने के कगार पर है।

ईयू की तरफ से बात करें, तो अन्य प्रमुख वस्तुओं के टैरिफ में से जैतून के तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेलों के आयात पर टैरिफ को मौजूदा 45 प्रतिशत से घटाकर निकट भविष्य में शून्य कर दिया जाएगा। इसी तरह भेड़ के मांस पर टैरिफ 30 प्रतिशत से शून्य कर दिया जाएगा।

व्यापारिक सूत्रों ने कहा कि ईयू से जैतून के तेल का सस्ता आयात चिंता की कुछ बात है क्योंकि जैतून भारत में बिकने वाले सबसे महंगे खाद्य तेलों में से एक है और इसका उपयोग केवल खाद्य उत्पादों की ड्रेसिंग के लिए किया जाता है। भेड़ के मांस के लिए भी व्यापारियों ने कहा कि यह केवल खास बाजारों की मांग को ही पूरा करेगा।

जैतून के तेल की बात करें, तो भारत हर साल मुख्य रूप से ईयू के स्पेन और इटली से लगभग 20,000 से 25,000 टन का आयात करता है, लेकिन इसकी कीमत लगभग 700 रुपये प्रति लीटर है, जो भारत में उपलब्ध उन सबसे सस्ते खाद्य तेलों से कहीं अधिक है, जिनकी कीमत लगभग 110 से 150 रुपये प्रति लीटर है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक बीवी मेहता ने कहा, ‘शुल्क भले ही कम कर दिया जाए, तो भी कीमतों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और अपरिष्कृत जैतून का तेल भारत में उपलब्ध सबसे महंगे खाद्य तेलों में से एक बना रहेगा।’ 

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First Published - January 27, 2026 | 10:39 PM IST

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