कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से डॉलर के मुकाबले रुपया आज लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच शत्रुता समाप्त करने के लिए अस्थायी समझौता होने की उम्मीद बढ़ने से तेल के दाम में नरमी आई है। इस खबर से मुद्रा बाजार में डॉलर की बिकवाली और शॉर्ट कवरिंग को बढ़ावा मिला जिससे रुपया मजबूत हुआ।
ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने से रुपया 0.39 फीसदी चढ़कर 94.25 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बुधवार को रुपया 94.61 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। ब्रेंट क्रूड कारोबार के दौरान 95.66 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर आ गया था। इस बीच 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 1 आधार अंक बढ़कर 6.93 फीसदी पर बंद हुई।
मुद्रा बाजार के डीलरों ने बताया कि तेल की कीमतों में नरमी से रुपये की गिरावट पर दांव लगाने वालों के स्टॉप-लॉस ट्रिगर हो गए जबकि नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) बाजार में डॉलर की बिकवाली से रुपये को और मजबूती मिली। पिछले दो सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपये 1 फीसदी से अधिक चढ़ा है।
आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी अभिषेक गोयनका ने कहा, ‘अमेरिका और ईरान की वार्ता में संभावित सफलता की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट के कारण रुपये में अच्छी मजबूती देखी गई।’ उन्होंने कहा, ‘रुपये की शॉर्ट पोजीशन पर स्टॉप-लॉस और साथ ही नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर की बिक्री ने रुपये को और मजबूती दी। तेल की कीमतों में आई व्यापक गिरावट ने एशियाई मुद्राओं को भी सहारा दिया।’
डॉलर के मुकाबले रुपया अच्छा प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा रही। एशियाई मुद्राओं में केवल फिलीपींस की पेसो और मलेशियाई रिंगिट ने ही रुपये से ज्यादा बढ़त हासिल की। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद मार्च में डॉलर की तुलना में रुपये में करीब 4 फीसदी की गिरावट आई थी। अप्रैल से अब तक यह 0.6 फीसदी मजबूत हुई है। हालांकि इस साल अभी तक रुपया 4.64 फीसदी कमजोर हुआ है।
नोमूरा की एक रिपोर्ट के अनुसार कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भुगतान संतुलन घाटा बढ़ने की आशंका है। वित्त वर्ष 2027 में इसके 68 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) रुपये को सहारा देने के लिए विदेशी मुद्रा जमा जुटाने की योजनाओं पर विचार कर रहा है।
इस बीच आरबीआई को चार-दिवसीय वेरिएबल रेट रीपो (वीआरआर) नीलामी में कमजोर मांग प्राप्त हुई। बैंकों ने 75,000 करोड़ रुपये की अधिसूचित राशि के मुकाबले 10,795 करोड़ रुपये की बोली लगाई।