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सुप्रीम कोर्ट ने नए UGC नियमों के लागू होने पर रोक लगाई, जारी रहेंगे 2012 के नियम

SC ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी किया, UGC ने 13 जनवरी को नए नियम नोटिफाई किए थे

Last Updated- January 29, 2026 | 1:34 PM IST
Supreme Court of India
File Image

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को UGC प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026 पर रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि ये पहली नजर में अस्पष्ट हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इन रेगुलेशंस को फिर से बनाने का निर्देश दिया, और कहा कि तब तक नए नियमों को लागू नहीं किया जाएगा। इस नियम को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं में कहा गया था कि UGC ने जाति भेदभाव की परिभाषा बहुत सीमित रखी है और कुछ वर्गों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया है।

UGC ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने से जुड़े नए नियम नोटिफाई किए थे। इन नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में “इक्विटी कमेटी” (समानता समिति) बनाना अनिवार्य किया गया था, जिसका काम भेदभाव से जुड़ी शिकायतों पर विचार करना और समानता को बढ़ावा देना है।

नए UGC नियमों में क्या प्रावधान

UGC (उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा) नियम, 2026 के अनुसार, इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), दिव्यांग और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य किया गया था। ये नए नियम साल 2012 के पुराने नियमों की जगह लाए गए थे, जो केवल एडवाइजरी प्रकृति के थे।

याचिकाओं में क्या हैं आरोप

याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि नए नियमों में जाति आधारित भेदभाव को केवल SC, ST और OBC वर्गों तक सीमित कर दिया गया है। इससे सामान्य या गैर-आरक्षित वर्ग के ऐसे लोगों को संस्थागत सुरक्षा और शिकायत निवारण का अधिकार नहीं मिल पाता, जो अपनी जाति के आधार पर भेदभाव या उत्पीड़न का सामना करते हैं। इस नियम के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए। छात्र संगठनों और अन्य समूहों ने इन नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

First Published - January 29, 2026 | 1:28 PM IST

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