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US ट्रेजरी सचिव ने भारत-EU FTA पर साधा निशाना, बोले- यूरोप ने यूक्रेन से ऊपर व्यापार को रखा

स्कॉट बेसेंट का आरोप- भारत के साथ व्यापार समझौते के लिए यूरोप ने यूक्रेन युद्ध को किया नजरअंदाज, रूस के तेल से परोक्ष रूप से जंग को फंड कर रहा EU

Last Updated- January 29, 2026 | 10:27 AM IST
Scott Bessent on India EU FTA
File Image

India EU FTA: अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए हाल में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से साफ है कि यूरोप ने यूक्रेन को लेकर अपनी घोषित चिंताओं से ज्यादा व्यापारिक हितों को तरजीह दी है।

सीएनबीसी से बातचीत में बेसेंट ने यूरोप के रुख पर नाराजगी जताते हुए कहा, “उन्हें अपने हित में जो सही लगे वह करना चाहिए, लेकिन मुझे यूरोप का यह रवैया बेहद निराशाजनक लगता है।” उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय में की जब यूक्रेन में युद्ध जारी है।

उनकी यह प्रतिक्रिया भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते के अंतिम रूप लेने के एक दिन बाद आई। इस समझौते का मकसद द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाना और वैश्विक व्यापार तनाव के बीच अमेरिका पर यूरोप की निर्भरता कम करना है।

बेसेंट ने कहा कि यही व्यापार समझौता इस बात की वजह है कि यूरोप ने पिछले साल भारत पर ऊंचे टैरिफ लगाने के अमेरिका के फैसले का समर्थन नहीं किया।

उन्होंने कहा कि यूरोप अमेरिका के साथ इसलिए नहीं आया क्योंकि वह भारत के साथ यह व्यापार समझौता करना चाहता था। इसलिए जब भी आप किसी यूरोपीय नेता को यूक्रेनी लोगों की चिंता करते सुनें, तो याद रखें कि उन्होंने व्यापार को यूक्रेन से ऊपर रखा।

रूस के युद्ध को परोक्ष रूप से फंड करने का आरोप

स्कॉट बेसेंट ने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश ऊर्जा खरीद के जरिए रूस के युद्ध प्रयासों को परोक्ष रूप से फंडिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूस का कच्चा तेल भारत जाता है, वहां रिफाइन होता है और फिर वही रिफाइंड उत्पाद यूरोप को बेचे जाते हैं। रूसी तेल भारत जाता है, वहां रिफाइन होकर निकलता है और यूरोप उसे खरीदता है। इस तरह यूरोप खुद अपने खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहा है।

यह भी पढ़ें: India-EU FTA में बाजार पहुंच की बाधाओं से निपटने के लिए बनेगा स्पेशन ‘रैपिड रिस्पॉन्स मैकेनिज्म’

उन्होंने बताया कि उन्होंने यह चिंता पिछले सप्ताह भी उठाई थी। इससे पहले, एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा था कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25% टैरिफ लगाए, जबकि उसी दौरान यूरोप ने भारत के साथ व्यापार समझौता कर लिया।

अमेरिका-यूरोप रिश्तों में बढ़ता तनाव

बेसेंट के बयान अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते तनाव को भी दर्शाते हैं। इससे पहले राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर कुछ यूरोपीय आयातों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

बेसेंट ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के प्रयासों में अमेरिका ने यूरोप की तुलना में कहीं ज्यादा दबाव और बलिदान दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं और इस दिशा में अमेरिका ने यूरोप से कहीं अधिक त्याग किया है।

First Published - January 29, 2026 | 10:27 AM IST

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