देश के ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी उद्योग में संस्थागत पूंजी के निवेश की नई लहर दिख रही है। इससे इस क्षेत्र की जोरदार रफ्तार का पता चलता है। इस महीने की शुरुआत में लेमन ट्री होटल्स ने ऐलान किया था कि अमेरिका की बहुराष्ट्रीय निजी इक्विटी कंपनी वारबर्ग पिंकस उसकी सब्सिडियरी फ्लेर होटल्स के विकास पर 960 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। साथ ही वह डच पेंशन फंड एपीजी से फ्लेर होटल्स में 41.09 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीदेगी।
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों ने नोट में कहा, ‘कुल मिलाकर हम इस सौदे को सकारात्मक रूप से देख रहे हैं क्योंकि इससे वारबर्ग पिंकस फिर से पूंजी ला रही है और यह पूंजी इस बार फ्लेर के जरिए आ रही है। उनकी मौजूदगी ऑरिका नेहरू प्लेस जैसे भविष्य के बड़े स्तर वाले पूंजीगत व्यय का जोखिम कम करती है और फ्लेर की सूचीबद्धता के लिए सहज रास्ता सुनिश्चित करती है।’
हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की परिसंपत्ति निर्माण करने वाली कंपनी शैले होटल्स के मुख्य परिचालन अधिकारी गौरव सिंह ने कहा, ‘व्यावहारिक रूप से संस्थागत पूंजी परिसपत्ति स्वामित्व और परिचालन प्लेटफार्मों के बीच स्पष्ट अंतर को सक्षम बनाती है, जिससे स्थापित परिचालकों को बैलेंस शीट पर अधिक दबाव डाले बिना भौगोलिक रूप से विस्तार करने की अनुमति मिलती है।’