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Economic Survey में ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ पर जोर: लाइव कॉन्सर्ट और रचनात्मकता से चमकेगी देश की GDP

कोविड-19 महामारी के बाद से लाइव कॉन्सर्ट ने बहुत मजबूत वापसी की है। 2024 में इन्होंने 100 अरब रुपये का आंकड़ा पार कर लिया और इनका लाभ अन्य क्षेत्रों को भी मिला

Last Updated- January 29, 2026 | 11:13 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आर्थिक समीक्षा में लाइव कॉन्सर्ट और मनोरंजक कार्यक्रमों को ऐसी सेवा प्रधान गतिविधियों के रूप में चिह्नित किया गया है जो केवल टिकट बिक्री से परे उच्च आर्थिक मूल्य तैयार करती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये पर्यटन, रोजगार और शहरी सेवाओं की भूमिका तैयार करते हैं। इसे ऑरेंज इकनॉमी का नाम दिया गया है जो रचनात्मकता, संस्कृति और बौद्धिक संपदा से संचालित होती है। समीक्षा ने इसे मीडिया, पर्यटन और संबद्ध सेवाओं के लिए उभरते हुए विकास के साधन के रूप में भी रेखांकित किया है। समीक्षा में प्रस्ताव रखा गया है कि विरासती जगहों को ऐसे कार्यक्रमों के लिए खोला जाए तथा विदेशी कलाकारों या प्रस्तोताओं के लिए वीजा और विदेशी मुद्रा अनुमतियों को भी सुगम बनाया जाए।

कोविड-19 महामारी के बाद से लाइव कॉन्सर्ट ने बहुत मजबूत वापसी की है। 2024 में इन्होंने 100 अरब रुपये का आंकड़ा पार कर लिया और इनका लाभ अन्य क्षेत्रों को भी मिला। भारत में कॉन्सर्ट अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी नहीं है लेकिन वह निरंतर प्रगति कर रही है। समीक्षा के मुताबिक इसमें युवा आबादी, बढ़ती आय, डिजिटल टिकट प्लेटफॉर्म और बेहतर शहरी बुनियादी ढांचा महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

गत वर्ष ब्रिटिश रॉक बैंड कोल्ड प्ले ने मुंबई और अहमदाबाद में पांच कॉंन्सर्ट किए जो पूरी तरह फुल थे। इस वर्ष अमेरिकी रॉक बैंड लिंकिंन पार्क और गायक जॉन मेयर के आयोजन सुर्खियों में है। बहरहाल, लाइव कार्यक्रम स्थलों की कमी बनी रही और विदेश से आने वाले कलाकारों को किए जाने वाले विदेशी भुगतान पर प्रतिबंध भी जारी रहे। समीक्षा में कहा गया, ‘इसे देखते हुए ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय लाइव मनोरंजन मंजूरी के लिए एकल-खिड़की तंत्र पर काम कर रहा है, जिसमें राज्य सरकारों से आवश्यक अनुमतियां भी शामिल हैं।’ 

समीक्षा में अंतरराष्ट्रीय प्रमाणों के सहारे बताया गया कि लाइव कॉन्सर्ट टिकट बिक्री से परे भी आर्थिक मूल्य तैयार करते हैं। विश्व स्तर पर लाइव संगीत कुल संगीत राजस्व के एक तिहाई के लिए जिम्मेदार होता है।  समीक्षा में कहा गया कि यूएनसीटीएडी के अनुमानों के मुताबिक विभिन्न देशों के जीडीपी में रचनात्मक उद्योग 0.5 से 7 फीसदी तक का योगदान करते हैं। पर्यटन मंत्रालय के अनुमानों के मुताबिक वित्त वर्ष 24 में यात्रा और पर्यटन ने जीडीपी में 5.22 फीसदी का योगदान किया जो महामारी के पहले के स्तर के करीब है। इसने 8.46 करोड़ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगारों में भी मदद पहुंचाई।

समीक्षा में यह संकेत भी किया गया कि भारत में विशिष्ट पर्यटन खंडों में तमाम संभावनाएं मौजूद हैं। वहीं, विशाल तटरेखा पर आधुनिक मरीन अधोसंरचना विकसित की जा सकती है, जो जल-आधारित पर्यटन सुविधाएं प्रदान करें।

समीक्षा के मुताबिक गुजरात की बुनियादी ढांचा और कार्यक्रम-आधारित पर्यटन पहलें विभागों के बीच समन्वित योजना और क्रियान्वयन से होने वाले लाभों को दर्शाती हैं। वहीं, केरल का राज्य-नेतृत्व वाला गंतव्य प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी एक पारिस्थितिक रूप से उपयुक्त और जिम्मेदार पर्यटन मॉडल का समर्थन करता है। सिक्किम का स्थिरता पर ध्यान और आगंतुकों की नियंत्रित संख्या यह दर्शाती है कि प्रभावी विनियमन और सामुदायिक भागीदारी कैसे किसी जगह की गुणवत्ता को सुरक्षित कर सकती है।

समीक्षा ने संकेत दिया कि पर्यटन के लिए विशिष्ट खंडों का निर्माण आवश्यक है, जैसे लंबी दूरी की हाइकिंग ट्रेल्स, और एक राष्ट्रीय मरीना विकास नीति। यह भी कि लाइव कार्यक्रमों के लिए अनुमतियों को सरल बनाना, विरासत स्थलों को खोलना और विदेशी कलाकारों की भागीदारी को सुगम बनाना कॉन्सर्ट और ऑरेंज अर्थव्यवस्था की क्षमता को साकार करने में मदद करेगा।

First Published - January 29, 2026 | 11:13 PM IST

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