इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) को अपनी शोधन क्षमता में विस्तार के बीच पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए अफ्रीका और यूरोप के महत्त्वपूर्ण बाजारों के रूप में उभरने की उम्मीद है। कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एएस साहनी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से यह बात कही।
यह देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी है जिसकी कुल वार्षिक क्षमता 8.07 करोड़ टन (एमएमटीपीए) है। यह मुख्य रूप से घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करती है, जबकि निर्यात से इसकी बिक्री का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही होता है। इसका लक्ष्य 2028 तक शोधन क्षमता को बढ़ाकर 9.84 करोड़ टन प्रति वर्ष करना है।
साहनी ने कहा, ‘भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ा रहा है। मैं लगभग 1.8 करोड़ टन क्षमता बढ़ाऊंगा, जिसका मतलब है कि विस्तारित रिफाइनिंग क्षमता का 40 प्रतिशत हिस्सा इंडियन ऑयल से आएगा। घरेलू (ईंधन खपत) में 4-5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। हमें निर्यात पर ध्यान देना होगा, खासकर डीजल का।’ चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में आईओसी की कुल बिक्री में निर्यात का हिस्सा केवल 5.5 प्रतिशत था।
भारतीय रिफाइनरियों में, रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी सहित निजी कंपनियां प्रमुख निर्यातक हैं, जबकि संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) मुख्य रूप से घरेलू बाजार में ईंधन बेचते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत जल्द ही विश्व की सबसे बड़ी तेल शोधन क्षमता वाला देश बन जाएगा।
आईओसी वर्तमान में अपनी प्रमुख रिफाइनरियों की क्षमता का विस्तार कर रही है। पानीपत रिफाइनरी की क्षमता 1.5 करोड़ टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 2. 5 करोड़ टन प्रति वर्ष की जा रही है, जबकि गुजरात रिफाइनरी (कोयाली) की क्षमता मौजूदा 1.37 करोड़ टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 1.8 करोड़ टन प्रति वर्ष की जा रही है। कंपनी ने बताया कि बरौनी में 90 लाख टन प्रति वर्ष तक क्षमता विस्तार का कार्य उन्नत चरणों में है।
कंपनी 2030 तक अपनी पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता को 43 लाख टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 1.3 करोड़ टन प्रति वर्ष करने की योजना बना रही है। साहनी ने कहा कि इंडियन ऑयल कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाकर मौजूदा भू-राजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए आश्वस्त है। कंपनी कच्चे तेल की खरीद के लिए गुयाना और ब्राजील सहित अन्य पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर भी देख रही है।