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Economic Survey 2026: वै​श्विक खींचतान से निपटने के लिए स्वदेशी पर जोर

समीक्षा में कहा गया है कि भारत ने मजबूत वृहद आ​र्थिक बुनियादी सिद्धांतों के कारण अनिश्चितता भरी दुनिया में अभी तक अच्छा प्रदर्शन किया है

Last Updated- January 29, 2026 | 11:35 PM IST
Economic survey 2025-26

भारत को रक्षात्मक आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर रणनीतिक अपरिहार्यता के लक्ष्य के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवस्थित रूप से महत्त्वपूर्ण कड़ी बनने की ओर बढ़ना चाहिए। संसद में आज पेश वित्त वर्ष 2025-26 की आ​र्थिक समीक्षा में यह बातें कही गई हैं। समीक्षा में स्वदेशी को देश की रणनीति में व्यापक बदलाव के केंद्र में रखा गया है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा, ‘वैश्विक व्यवस्था की प्रकृति बदल गई है। व्यापार अब पारस्परिक नहीं है। बाजार अब तटस्थ नहीं हैं और आपूर्ति श्रृंखला देश की शक्ति के साधन बन गए हैं। ऐसी दुनिया में स्वदेशी वैध नीतिगत उपाय है।’ उन्होंने आगे कहा कि भारत को इस तरह के वैश्विक माहौल में स्वदेशी की शपथ लेने से हिचकिचाना नहीं चाहिए।

समीक्षा में कहा गया है कि नीतिगत प्रश्न अब यह नहीं है कि देश को स्वदेशी को प्रोत्साहित करना चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि दक्षता, नवाचार या वैश्विक एकीकरण को कमजोर किए बिना ऐसा कैसे किया जाए।

समीक्षा में कहा गया है कि भारत ने मजबूत वृहद आ​र्थिक बुनियादी सिद्धांतों के कारण अनिश्चितता भरी दुनिया में अभी तक अच्छा प्रदर्शन किया है। इसे सुविचारित राजकोषीय रणनीति से भी फायदा मिला है जिसने घाटे और ऋण को लगातार कम करते हुए पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी।

समीक्षा में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026 में 7.4 फीसदी और वित्त वर्ष 2027 में 6.8 से 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। नीतिगत सुधारों के दम पर मध्यम अवधि की वृद्धि दर का अनुमान वित्त वर्ष 2023 की आ​र्थिक समीक्षा में अनुमानित 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया गया है।

समीक्षा में तर्क दिया गया है कि भारत की विकास चुनौती झटकों को झेलने से आगे बढ़कर ऐसी क्षमताएं बनाने की हो गई है जो अर्थव्यवस्था को वैश्विक उत्पादन का अभिन्न अंग बनाती हैं।

आ​र्थिक समीक्षा में कहा गया है, ‘घरेलू मांग की प्रमुख भूमिका और वृहद आर्थिक स्थिरता के साथ वृद्धि के आसपास जोखिमों का संतुलन मोटे तौर पर समान बना हुआ है।

समीक्ष में तर्क दिया गया है कि भारत की विकास चुनौती केवल झटकों को झेलने से आगे बढ़कर ऐसी क्षमताएं बनाने की हो गई है जो अर्थव्यवस्था को वैश्विक उत्पादन और वित्तीय तंत्र का अभिन्न अंग बनाती हैं। समीक्षा के मुताबिक औद्योगीकरण के अगले चरण में आयात प्रतिस्थापन पर केंद्रित मॉडल से प्रतिस्पर्धात्मकता, नवाचार पर केंद्रित मॉडल को अपनाने की आवश्यकता होगी।

प्रत्येक खंड में पूर्ण आत्मनिर्भरता के बजाय, भारत को विविधीकरण और रणनीतिक लचीलापन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इस यात्रा में सूक्ष्म, लघु एवं मघ्यम उपक्रम (एमएसएमई) महत्त्वपूर्ण होंगे, जो छोटे स्तर पर उत्पादन से औपचारिक और निर्यात से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला में व्यापक भागीदारी की ओर बढ़ेंगे।

लेकिन समीक्षा में वैश्विक उथल-पुथल के बारे में भी आगाह किया गया है। इसमें चेतावनी दी गई है कि अगर एआई बूम उम्मीद के मुताबिक उत्पादकता में लाभ नहीं दे पाता है तो परिसंप​त्ति की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर असर पड़ सकता है। दीर्घकालिक व्यापारिक संघर्ष वै​श्विक निवेश और वृद्धि पर और असर डालेंगे।

भारत के लिए ये जो​खिम वृहद आ​​र्थिक दबाव के बजाय बाहरी अनिश्चितताओं के रूप में दिखते हैं, खास तौर पर कमजोर निर्यात मांग, शुल्क के कारण व्यापार में बाधा और अ​स्थिर पूंजी का प्रवाह के लिहाज से। इसके बावजूद समीक्षा में उम्मीद जताई गई है कि घरेलू सुधार आगे बढ़ेंगे।

इसमें कहा गया है कि मुश्किल वर्षों का इस्तेमाल माल एवं सेवा कर को बेहतर बनाने, नियमन को खत्म करने और अनुपालन को आसान बनाने में तेजी लाने के लिए किया गया था। वित्त वर्ष 2027 समायोजन का साल होगा क्योंकि फर्म और परिवार इन बदलावों के हिसाब से खुद को ढालेंगे और निवेश धीरे-धीरे मजबूत होगा।

First Published - January 29, 2026 | 11:22 PM IST

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