facebookmetapixel
राज्यों के पूंजीगत व्यय की धीमी रफ्तार: 9 महीनों में बजट का केवल 46% हुआ खर्च, केंद्र के मुकाबले पिछड़ेअर्थव्यवस्था 7% की रफ्तार से बढ़ सकती है, आगे के सुधारों से वृद्धि दर में और तेजी संभव: CEA वी अनंत नागेश्वरनराजकोषीय मोर्चे पर राहत: चालू वित्त वर्ष के 9 महीनों में बजट अनुमान का 54.5% रहा राजकोषीय घाटाविश्व बैंक का भारत को बड़ा समर्थन: अगले 5 वर्षों में रोजगार के लिए मिलेगा $10 अरब तक सालाना लोनभारत में iPhone 16 बना सबसे ज्यादा बिकने वाला स्मार्टफोन, Apple का दबदबा बढ़ा2026 की खराब शुरुआत: जनवरी में शेयर बाजार 10 साल में सबसे कमजोर, सेंसेक्स-निफ्टी 3% से ज्यादा गिरेजीप इंडिया का मास्टरप्लान: ‘Jeep 2.0’ रणनीति के साथ भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनाने की तैयारीGold-Silver ETF में सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट, डॉलर मजबूत होने से निवेशकों में घबराहटमेटल शेयरों की भारी बिकवाली से बाजार लुढ़का, बजट से पहले सेंसेक्स-निफ्टी पर दबावITC का बड़ा दांव: प्रीमियम प्रोडक्ट्स में शामिल हुआ ‘ताजा जायका’, अब सीधे क्लाउड किचन से होगी डिलीवरी

सावधान! पुरानी इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर हो रही बड़ी ठगी, ‘रिफंड’ के कॉल आए तो हो जाएं सचेत

एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि ठग कंपनी के कर्मचारी और इंडस्ट्री रेगुलेटर बनकर पॉलिसीहोल्डर्स से फर्जी प्रोसेसिंग फीस वसूलने की कोशिश कर रहे हैं

Last Updated- January 30, 2026 | 4:19 PM IST
scam
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

फोन बजता है और सामने से आवाज आती है कि “आपकी एक पुरानी इंश्योरेंस पॉलिसी है, जो अब बड़ी रकम बन चुकी है।” सुनते ही दिल खुश हो जाता है, है न? लेकिन यहीं से खेल शुरू होता है। ये एक तेजी से फैल रहा स्कैम है, जिसमें लोग फोन पर कहते हैं कि आपकी कोई पुरानी इंश्योरेंस पॉलिसी, जिसे आप भूल गए थे, अब काफी बड़ी रकम में बदल गई है। बस एक ‘छोटी-सी प्रक्रिया’ पूरी करनी है, और पैसा आपके हाथ में आ जाएगा।

बता दें कि कोई भी कंपनी या सरकारी संस्था खुद से फोन करके अनक्लेम्ड इंश्योरेंस का पैसा देने की बात नहीं करती। बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) का काम सिर्फ बीमाकर्ता और ग्राहक के बीच झगड़े सुलझाना है, वो भी तब जब ग्राहक खुद उनसे संपर्क करे। बीमा लोकपाल पुरानी पॉलिसी ट्रैक नहीं करता, न ही पेआउट कैलकुलेट करता है, और न ही अनसॉलिसिटेड फोन कॉल पर रिफंड का वादा करता है।

कोई भी सरकारी या बीमा से जुड़ी ऑफिस वाली कॉल, जिसमें अनक्लेम्ड पैसा लौटाने की बात हो, सीधे-सीधे फ्रॉड है।

ये कॉल इतने भरोसेमंद क्यों लगते हैं?

ठग बहुत अच्छी तैयारी करके आते हैं। वे अक्सर जानते हैं:

  • आपका पूरा नाम
  • किस कंपनी की पॉलिसी थी
  • पॉलिसी कब शुरू हुई थी
  • कितना प्रीमियम भरा था

ये जानकारी पुराने डेटाबेस या डेटा लीक से मिल जाती है, जिससे बात बहुत असली लगती है। कॉल करने वाले आत्मविश्वास से बोलते हैं और ऑफिशियल जैसे शब्द इस्तेमाल करते हैं, ताकि भरोसा बन जाए।

साथ ही ये ठग एक आम तरीके का इस्तेमाल करते हैं जो है ‘जल्दबाजी’। वे कहते हैं कि रिफंड की समय सीमा खत्म हो रही है या कुछ दिनों में एक्शन लेना होगा। मकसद ये है कि आप खुद जाकर चेक न कर पाएं। जल्दबाजी करवाना कोई संयोग नहीं, बल्कि बड़ा खतरे का संकेत है।

Also Read: सावधान! साइबर ठग लोगों को RBI का अधिकारी बनकर भेज रहे हैं वॉइसमेल, सरकार ने किया सचेत

सबसे बड़ा रेड फ्लैग: इन चीजों को न करें नजरअंदाज

कोई वैध इंश्योरेंस प्रक्रिया ऐसी नहीं है जिसमें पुरानी पॉलिसी का पैसा निकालने के लिए नई पॉलिसी खरीदनी पड़े।

अगर कोई नई पॉलिसी खरीदने को कहे, ‘प्रोसेसिंग फीस’ मांगे या पैसे ट्रांसफर करने को बोले ताकि रिफंड मिले तो समझ लीजिए, ये 100% ठगी है। पैसे देने के बाद वो गायब हो जाते हैं और वादा किया पैसा कभी नहीं आता।

लैप्स्ड इंश्योरेंस पॉलिसी असल में कैसे काम करती हैं?

सचाई इन कॉलों जितनी ड्रामेटिक नहीं है। ट्रेडिशनल पॉलिसी जैसे एंडोमेंट या मनी-बैक प्लान अगर जल्दी लैप्स हो जाएं और सरेंडर वैल्यू न बनी हो, तो प्रीमियम जब्त हो जाते हैं और रिफंड कुछ नहीं मिलता।

यूनिट-लिंक्ड प्लान में लैप्स होने पर फंड वैल्यू खत्म नहीं होती। वो डिसकंटिन्यूएशन फंड में चली जाती है और 5 साल बाद निकाली जा सकती है, कुछ चार्ज कटने के बाद। किसी भी केस में छोटा प्रीमियम अचानक बड़ी कमाई में नहीं बदलता।

क्या करें इसके बजाय

अगर आपको पुरानी पॉलिसी के बारे में शक है, तो खुद कंपनी से संपर्क करें। कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट से नंबर या ईमेल से ही संपर्क करें। पॉलिसी का स्टेटस पूछें और देखें कि कोई अमाउंट मिल सकता है या नहीं।अनसॉलिसिटेड कॉल पर ध्यान न दें। कभी डॉक्यूमेंट, OTP या बैंक डिटेल्स शेयर न करें। और बातों-बातों में पैसे देने का फैसला कभी न लें।

First Published - January 30, 2026 | 3:52 PM IST

संबंधित पोस्ट