facebookmetapixel
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत में 18.3% का इजाफा, बजट बढ़कर ₹35.1 लाख करोड़ पहुंचामॉनसून पर मंडराया अल नीनो का साया: स्काईमेट ने जताई 2026 में सूखे और कम बारिश की गंभीर आशंकाPDS में अनाज की हेराफेरी पर लगेगा अंकुश, सरकार लाएगी डिजिटल ई-रुपी वाउचरIndia- EU FTA से 5 साल में यूरोप को निर्यात होगा दोगुना, 150 अरब डॉलर तक पहुंचेगा व्यापार: पीयूष गोयलMoody’s का दावा: यूरोपीय संघ के साथ समझौता भारत को देगा बड़ा बाजार, अमेरिकी टैरिफ से मिलेगी सुरक्षाRBI का नया कीर्तिमान: स्वर्ण भंडार और डॉलर में उतार-चढ़ाव से विदेशी मुद्रा भंडार सर्वकालिक उच्च स्तर परBPCL की वेनेजुएला से बड़ी मांग: कच्चे तेल पर मांगी 12 डॉलर की छूट, रिफाइनिंग चुनौतियों पर है नजरमासिक धर्म स्वास्थ्य अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार: छात्राओं को मुफ्त मिलेगा सैनिटरी पैड500 यूनिवर्सिटी छात्रों को मिलेंगे GPU और AI टूल्स, इंडिया AI मिशन का दायरा बढ़ाएगी सरकारराज्यों के पूंजीगत व्यय की धीमी रफ्तार: 9 महीनों में बजट का केवल 46% हुआ खर्च, केंद्र के मुकाबले पिछड़े

राज्यों के पूंजीगत व्यय की धीमी रफ्तार: 9 महीनों में बजट का केवल 46% हुआ खर्च, केंद्र के मुकाबले पिछड़े

सीएजी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों, यानी अप्रैल से दिसंबर तक, केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय अपने बजट अनुमान के 70.3 प्रतिशत तक पहुंच गया

Last Updated- January 30, 2026 | 10:19 PM IST
Rupees
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा जारी किए गए 20 राज्यों के मासिक खातों के विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों (अप्रैल-दिसंबर) के बाद राज्यों ने अपने संयुक्त वार्षिक बजट पूंजीगत व्यय के केवल 45.8 प्रतिशत या 3.8 लाख करोड़ रुपये खर्च करने में सफलता पाई है जबकि उनका कुल बजट 8.35 लाख करोड़ रुपये है।

राज्यों के पूंजीगत व्यय की धीमी रफ्तार, इसी अवधि के दौरान केंद्र सरकार के प्रदर्शन के बिलकुल विपरीत है। सीएजी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों, यानी अप्रैल से दिसंबर तक, केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय अपने बजट अनुमान के 70.3 प्रतिशत तक पहुंच गया।

जिन 20 राज्यों के आंकड़े उपलब्ध हैं, उनमें से 14 राज्यों ने अप्रैल और दिसंबर के बीच पूंजीगत व्यय के लिए अपने बजट अनुमान का आधा से भी कम खर्च किया। तेलंगाना एक अपवाद के रूप में सामने आया, जो अपने बजट पूंजीगत व्यय से ज्यादा खर्च करने वाला एकमात्र राज्य बना और इसकी उपयोगिता दर 116.95 प्रतिशत थी। इसके बाद हरियाणा 97.49 प्रतिशत, केरल 66.53 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश 61.24 प्रतिशत के स्तर पर रहे।

दूसरी ओर, सात राज्यों ने विशेष रूप से कम प्रगति दिखाई। त्रिपुरा ने इस अवधि के दौरान अपने बजट के पूंजीगत व्यय का 22 प्रतिशत खर्च किया जबकि पश्चिम बंगाल ने 24.4 प्रतिशत उपयोग किया। वहीं छत्तीसगढ़ (27.1 प्रतिशत) और मणिपुर (29.4 प्रतिशत), मेघालय (30.4 प्रतिशत), पंजाब (33.5 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (34.4 प्रतिशत) में से सभी ने अपने वार्षिक आवंटन का 35 प्रतिशत से भी कम खर्च किया। इसकी तुलना में, पिछले वित्तीय वर्ष में 25 राज्यों के डेटा ने बहुत अधिक पूंजीगत व्यय का उपयोग दिखाया। वित्त वर्ष 2025 में, राज्यों ने सामूहिक रूप से अपने बजटीय पूंजीगत व्यय का 80.2 प्रतिशत खर्च किया जो कुल 9.7 लाख करोड़ रुपये के आवंटन में से 7.8 लाख करोड़ रुपये था।

राजस्व व्यय में अधिक स्थिर प्रगति हुई है। अप्रैल-दिसंबर की अवधि के दौरान, 20 राज्यों ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तीन तिमाही में 38.73 लाख करोड़ रुपये के अपने बजट राजस्व व्यय का 60.9 प्रतिशत से अधिक खर्च किया। हिमाचल प्रदेश ने 71.1 प्रतिशत की सबसे अधिक उपयोगिता दर दर्ज की, इसके बाद पंजाब 68.3 प्रतिशत और केरल 67.6 प्रतिशत पर रहे। वहीं झारखंड (53.9 प्रतिशत), त्रिपुरा (51.8 प्रतिशत) और मणिपुर (49.1 प्रतिशत) इस श्रेणी में सबसे कम खर्च करने वालों में से थे।

प्राप्तियों की बात करें तो राज्यों ने इसी अवधि के दौरान 29.7 लाख करोड़ रुपये के अपने बजट कर राजस्व का 66.2 प्रतिशत जुटाया। असम अपने वार्षिक लक्ष्य के 72.6 प्रतिशत के बराबर संग्रह के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद हरियाणा 72.3 प्रतिशत और गुजरात 70.9 प्रतिशत पर रहे। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मणिपुर कर राजस्व के मोर्चे पर सबसे कम प्रदर्शन वाले राज्यों में शामिल थे।

उधार और अन्य देनदारियां आधी दूरी तक ही पहुंच पाईं क्योंकि राज्यों ने अपनी बजट उधारी का 50.2 प्रतिशत उपयोग किया और वित्त वर्ष 2026 के लिए लगभग 9 लाख करोड़ रुपये के पूरे साल के लक्ष्य के मुकाबले 4.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए।

केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि वित्त वर्ष के अंतिम महीनों में राज्य का पूंजीगत व्यय आमतौर पर बढ़ जाता है ऐसे में राज्य स्तर पर पूंजीगत व्यय रुझानों पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है क्योंकि वे ऐतिहासिक रूप से बजटीय पूंजीगत व्यय का कम उपयोग करते रहे हैं।

First Published - January 30, 2026 | 10:19 PM IST

संबंधित पोस्ट