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PDS में अनाज की हेराफेरी पर लगेगा अंकुश, सरकार लाएगी डिजिटल ई-रुपी वाउचर

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प्रस्ताव में कहा गया है कि ई-वाउचर पर छोटे स्तर पर शुरुआती परीक्षण होगा और इसमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) वाउचर जारी करने वाले बैंक के रूप में शामिल किया जाएगा

Last Updated- January 30, 2026 | 11:08 PM IST
PDS
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने एक बड़ी पहल के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में खाद्यान्न की हेराफेरी रोकने के लिए डिजिटल ई-रुपी वाउचर के इस्तेमाल से जुड़ा एक अवधारणा पत्र जारी किया है। मगर राशन दुकान मालिकों ने मंत्रालय के इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि ई-वाउचर पर छोटे स्तर पर शुरुआती परीक्षण होगा और इसमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) वाउचर जारी करने वाले बैंक के रूप में शामिल किया जाएगा। इस कार्य में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) तकनीकी भागीदार के रूप में सहयोग देगी।

इस वाउचर विशिष्ट मकसद के लिए जारी होंगे और गैर-मौद्रिक डिजिटल साधन के रूप में काम करेंगे। इनका इस्तेमाल कर लाभार्थी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत अपने हिस्से का  खाद्यान्न पीडीएस से प्राप्त करेंगे। अब इस कानून का नाम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) हो गया है। वाउचर डिजिटल मुद्रा के समतुल्य होंगे और केवल विशिष्ट खाद्य वस्तुओं (उदाहरण के लिए 10 किलो गेहूं या 10 किलो चावल) के लिए ही भुनाए जा सकेंगे। ये वाउचर आधार से जुड़े, गैर-हस्तांतरणीय और केवल एक खास महीने के लिए ही वैध होंगे।

इस तरह के वाउचर से लाभार्थियों के बदले उनके हिस्से का खाद्यान्न कोई और नहीं ले पाएगा।

हालांकि, अवधारणा पत्र में तो जिक्र नहीं है मगर विशेषज्ञों का एक वर्ग राशन की दुकानों के माध्यम से भौतिक अनाज वितरण के स्थान पर पीडीएस में ई-वाउचर के उपयोग की वकालत कर रहा है ताकि बढ़ती खाद्य सब्सिडी पर अंकुश लग सके और अनाज की खुली खरीद पर रोक लगाई जा सके। इस बीच, अवधारणा पत्र में कहा गया है कि पीडीएस में आधार प्रमाणीकरण, इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट-ऑफ-सेल उपकरण और ‘एक राष्ट्र एक राशन कार्ड’ (ओएनओआरसी) ढांचे जैसे कई सुधारों के बावजूद अंतिम स्तर पर परिचालन संबंधी चुनौतियां बरकरार हैं और लाभार्थियों को कम तौल और खराब गुणवत्ता वाले अनाज, डीलर की मनमानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे लाभार्थियों के विकल्प सीमित हो जाते हैं और मैनुअल रिपोर्टिंग के कारण डीलर आंकड़े भी बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं।

वास्तविक समय में लाभार्थी की पावती में भी सीमित पारदर्शिता है। पत्र में कहा गया है, ‘इन चुनौतियों को दूर करने के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग वाउचर जारी करने के लिए एसबीआई को साथ लेगा और एनआईसी इसमें तकनीकी भागीदार होगा। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) का ई-रुपी प्लेटफॉर्म पीडीएस तंत्र के साथ जोड़ा जाएगा।’

इस प्रक्रिया में सबसे पहले एनआईसी हरेक महीने एनएफएसए के तहत खाद्यान्न का डेटा तैयार करेगा जिन्हें एनपीसीआई के ई-रुपी प्लेटफॉर्म के माध्यम से वाउचर बनाने के लिए सुरक्षित एपीआई के माध्यम से एसबीआई को भेजा जाएगा। एक बार एनपीसीआई द्वारा वाउचर आईडी तैयार होने पर वे लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए एनआईसी को भेज दिए जाएंगे।

इसके बाद लाभार्थियों को एसएमएस  या क्यूआर कोड (मेरा राशन ऐप के माध्यम से) के माध्यम से ई-रुपी वाउचर प्राप्त होंगे जो तब एनआईसी प्रणाली में सुरक्षित रूप से सहेज कर रखे जाएंगे और लाभार्थी आधार टोकन से जुड़े होंगे। एक बार यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थी इसे उचित मूल्य की दुकान पर दिखाएगा। डीलर ईपीओएस उपकरण वाउचर आईडी स्कैन या दर्ज करेगा जो एनआईसी, एनपीसीआई और एसबीआई के माध्यम से वाउचर को प्रमाणित करेगा। अंत में बायोमेट्रिक/ओटीपी से पुष्टि होने और लाभार्थी की स्वीकृति के बाद उसे राशन दे दिया जाएगा।

खातों का निपटान करने के लिए एसबीआई अधिग्रहण कर्ता बैंक के साथ डिजिटल रूप से लेनदेन का निपटान करेगा और डीएफपीडी नीति के अनुसार संबंधित डीलर कमीशन रिकॉर्ड करेगा। यह सब एनआईसी और डीएफपीडी डैशबोर्ड में वास्तविक समय में दिखाई देखा।

अवधारणा पत्र में पहले चरण में एक शहरी और एक ग्रामीण जिले में प्रारंभिक परीक्षण शुरू करने की बात कही गई है। बेहतर परिणाम मिलने पर इसका विस्तार किया जाएगा। खबरों में कहा गया है कि खाद्य मंत्रालय ने अगले महीने से गुजरात के आणंद, साबरमती और दाहोद जिलों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में प्रारंभिक परीक्षण की योजना बनाई है। पहले एक सीमित क्षेत्र में इस पहल का लघु स्तर पर परीक्षण भी किया जाएगा। इस बीच, इस तरह की प्रणाली के लाभों पर अवधारणा पत्र में कहा गया है कि लाभार्थियों के लिए ई-वाउचर राशन में हेराफेरी रोकने में मददगार होंगे और आवेदन या एसएमएस  द्वारा बेहतर विश्वास, पारदर्शिता और सुविधा होगी।

सरकार के लिए वाउचर प्रणाली हेराफेरी रोकने और ऑडिट योग्य लेनदेन सुनिश्चित करने में मदद करेंगे। ये स्वचालित समाधान एवं निपटान, डैशबोर्ड के माध्यम से वास्तविक समय में दृश्यता और हेराफेरी एवं शिकायतें दूर करने में भी मददगार होंगे।

इस प्रणाली से भागीदार बैंकों को भी कई लाभ होंगे जिनमें सरकारी डिजिटल भुगतान तंत्र में मजबूत उपस्थिति, आरबीआई  डिजिटल संचालन उपायों के साथ तालमेल, केंद्र सरकार के साथ बढ़ी साझेदारी और दृश्यता शामिल हैं। यह प्रणाली भविष्य के कल्याण वितरण ढांचे के लिए शुरुआती परीक्षण के रूप में भी कार्य कर सकती है। पत्र में कहा गया है,‘इस सहयोग का उद्देश्य भारत के अपने वित्त-तकनीकी ढांचे का लाभ उठाते हुए एक सुरक्षित, जवाबदेह और लाभार्थी-केंद्रित ढांचे के माध्यम से पीडीएस को डिजिटल जामा पहनाना है।’

इस बीच, राशन दुकान डीलरों ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है और कुछ दिन पहले जारी एक बयान में कहा है कि यह प्रस्ताव चौंकाने वाला है और खाद्य वितरण की मौजूदा संरचना के लिए खतरनाक होगा। भारत में लगभग 500,000 राशन दुकानें हैं जो हर महीने लगभग 8 करोड़ लाभार्थियों को लाखों टन अनाज वितरित करती हैं।

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First Published - January 30, 2026 | 10:50 PM IST

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