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मॉनसून पर मंडराया अल नीनो का साया: स्काईमेट ने जताई 2026 में सूखे और कम बारिश की गंभीर आशंका

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भारत में मॉनसून के मौसम के बीच में अल नीनो मजबूत हो सकता है और यह उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दियों के दौरान अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकता है

Last Updated- January 30, 2026 | 10:53 PM IST
El Nino
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

मौसम का आकलन करने वाली निजी एजेंसी स्काईमेट ने शुक्रवार को कहा कि जलवायु के ज्यादातर मॉडल 2026 की दूसरी छमाही में अल नीनो की वापसी का पूर्वानुमान जता रहे हैं। अल नीनो के कारण सुमद्र के सतही जल का तापमान असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। भारत में मॉनसून के मौसम के बीच में अल नीनो मजबूत हो सकता है और यह उत्तरी गोलार्द्ध में सर्दियों के दौरान अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकता है।  

स्काईमेट के संस्थापक व अध्यक्ष जतिन सिंह ने शुक्रवार को जारी नोट में कहा, ‘इस तरह के विकास से मौसम की परिवर्तनशीलता का खतरा बढ़ जाता है। यह खतरा विशेष रूप से दक्षिण एशिया में बढ़ जाता है। इससे भारत में मानसून की वर्षा कम हो जाती है।’ सिंह ने कहा कि अल नीनो वर्षा के तरीके को बदल कर वैश्विक मौसम को महत्त्वपूर्ण रूप से बाधित करता है। इससे जोखिम वाले क्षेत्र जैसे ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण पूर्व एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप है।

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उन्होंने कहा कि शीर्ष निकाय एपीसीसी क्लाइमेट सेंटर ने आशंका जताई है कि सूखा लाने वाला अल नीनो  इस साल जुलाई के आसपास उभरने की आशंका है। इससे देश में जून और सितंबर के बीच होने वाली बारिश की मात्रा प्रभावित होगी। इससे देश में जून से सितंबर के बीच बारिश की मात्रा प्रभावित होने की आशंका है।

स्काईमेट के अनुसार अल नीनो 2014 और 2018 में भारतीय मॉनसून को खराब कर चुकी है। इस क्रम में 2014 का सीजन सूखे में समाप्त हुआ जबकि 2018 में बेहद कम अंतर से बच गया। अल नीनो जून में शुरू हुआ और यह 11 महीने तक जारी रहा। इससे भारत का मॉनसून प्रभावित हुआ। स्काईमेट के अनुसार अलनीनो के कारण वर्ष 2024 सबसे गर्म साल रहा था और यह अप्रैल, 2024 तक जारी था। स्काईमेट ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप खाद्य अनाज फसलें विशेष रूप से धान और दालें प्रभावित हुईं और इनका उत्पादन प्रभावित हुआ। इनका उत्पादन कम हुआ।  लिहाजा इस अवधि के दौरान खाने की वस्तुओं की महंगाई बढ़ी थी। 

पूर्ण विकसित अल नीनो से भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि अल नीनो का विकास हो रहा है। इससे  सामान्य से कम वर्षा होने की 60 प्रतिशत आशंका है। अल नीनो के विकास से मानसून के आगमन में देरी हो सकती है। मानसून की वर्षा का स्थानिक और सामयिक वितरण बिगड़ सकता है। इससे अक्सर लू की आवृत्ति, तीव्रता और अवधि में भी वृद्धि होती है।

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First Published - January 30, 2026 | 10:53 PM IST

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