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जीप इंडिया का मास्टरप्लान: ‘Jeep 2.0’ रणनीति के साथ भारत को ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनाने की तैयारी

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योजना के तहत जीप पुणे के पास अपने रंजनगांव विनिर्माण संयंत्र में स्थानीयकरण को मौजूदा 65-70 फीसदी से बढ़ाकर करीब 90 फीसदी करेगी

Last Updated- January 30, 2026 | 10:46 PM IST
JEEP
फोटो क्रेडिट: JEEP

जीप ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए नई दीर्घावधि रूपरेखा बनाई है। इसके तहत भारत उसका मुख्य बाजार होगा। उसने अपना ‘स्ट्रैटेजिक प्लान जीप 2.0’ भी पेश किया है। इस योजना का मकसद वाहन की लोकप्रियता बढ़ाना, स्थानीकरण को बढ़ावा देना, निर्यात का विस्तार करना और ग्राहकों का भरोसा मजबूत करना है। यह ब्रांड इस समय भारत में अत्यधिक प्रतिस्पर्धी प्रीमियम एसयूवी बाजार में मौजूद है।

योजना के तहत जीप पुणे के पास अपने रंजनगांव विनिर्माण संयंत्र में स्थानीयकरण को मौजूदा 65-70 फीसदी से बढ़ाकर करीब 90 फीसदी करेगी। इस संयंत्र की सालाना क्षमता 160,000 गाड़ियों की है और यह पहले से ही राइट-हैंड-ड्राइव बाजारों के लिए महत्त्वपूर्ण निर्यात आधार के तौर पर काम करता है। ज्यादा स्थानीयकरण से लागत प्रतिस्पर्धा बेहतर होने और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ने की उम्मीद है, साथ ही स्टेलेंटिस के वैश्विक उत्पादन और निर्यात नेटवर्क में भारत की भूमिका भी मजबूत होगी। कंपनी ने निर्यात के खास आंकड़े साझा नहीं किए हैं।

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उद्योग के अनुमानों के मुताबिक जीप भारत में हर महीने लगभग 250-300 गाड़ियां बेचती है। इसमें से लगभग आधी बिक्री कम्पास की होती है। कंपनी अभी कम्पास, मेरिडियन, ग्रैंड चेरोकी और रैंगलर बेचती है, जिनकी कीमत 17 लाख रुपये से 68 लाख रुपये के बीच है। वह बढ़ते एसयूवी सेगमेंट में अपनी पहचान बनाने में नाकाम रही है। एसयूवी सेगमेंट का भारत के 45 लाख घरेलू यात्री वाहन बाजार में 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा है। 

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First Published - January 30, 2026 | 10:04 PM IST

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